-टीबी अभियान में पटना की खराब स्थिति पर प्रभार बदला
-डॉ. रजनीश चौधरी से संचारी रोग पदाधिकारी का अतिरिक्त प्रभार हटा
-डॉ. लक्ष्मण प्रसाद को मिली जिम्मेदारी
पटना। टीबी मुक्त भारत अभियान में जिले के खराब प्रदर्शन को देखते हुए सीएस डॉ.योगेन्द्र प्रसाद मंडल ने संचारी रोग पदाधिकारी के अतिरिक्त प्रभार से डॉ. रजनीश चौधरी को मुक्त कर दिया है। अब यह जिम्मेदारी अनुमंडलीय अस्पताल, मसौढ़ी के चिकित्सक डॉ. लक्ष्मण प्रसाद को सौंपी है। प्रभार में यह बदलाव ऐसे समय किया गया है, जब टीबी मुक्त भारत अभियान के विभिन्न सूचकांकों में पटना की स्थिति पर लगातार सवाल उठ रहे हैं।
सीएस ने कहा कि एनपीवाई भुगतान बिहार में सबसे अधिक लंबित रहने की स्थिति सामने आयी है। इसके अलावा प्रखंडों में टीबी की दवा और Falcon Tube की उपलब्धता लगातार सुनिश्चित नहीं हो पा रही है। जिले के शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में उपलब्ध ट्रूनेट मशीनों से अपेक्षित जांच भी नहीं होने की बात समीक्षा में सामने आयी है।

लगातार समीक्षा के बावजूद नहीं सुधरा प्रदर्शन
टीबी मुक्त भारत अभियान की समीक्षा मुख्य सचिव स्तर पर प्रत्येक सप्ताह की जा रही है। साथ ही डीएम एवं डीडीसी भी अभियान की प्रतिदिन समीक्षा करते है। इसके बावजूद जिले के सूचकांकों में अपेक्षित सुधार नहीं होने पर संचारी रोग पदाधिकारी के अतिरिक्त प्रभार में बदलाव किया गया है।
उन्होंने कहा कि डीडीसी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कार्यों टीबी मुक्त भारत अभियान की समीक्षा की गयी। इस दौरान अभियान में अपेक्षित रुचि नहीं लिये जाने की स्थिति को देखते हुए किसी अन्य योग्य पदाधिकारी को कार्यक्रम का प्रभार देने के लिए कहा गया।
सचिव की बैठक से पहले भी नहीं दिखी अपेक्षित प्रगति
16 सितंबर 2026 को सचिव, स्वास्थ्य विभाग, बिहार की अध्यक्षता में होने वाली बैठक से पहले राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी, यक्ष्मा की प्रस्तुतीकरण में भी पटना जिले के टीबी मुक्त भारत अभियान के सूचकांकों में अपेक्षित प्रगति नहीं दिखी। इसके बाद सिविल सर्जन ने प्रभार में बदलाव का आदेश जारी किया।
दवा और जांच व्यवस्था पर भी सवाल
समीक्षा में केवल भुगतान ही नहीं, बल्कि टीबी मरीजों से जुड़ी दवा और जांच व्यवस्था भी सवालों के घेरे में रही। प्रखंड स्तर पर टीबी की दवा और Falcon Tube की नियमित उपलब्धता नहीं होने तथा शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में ट्रूनेट जांच अपेक्षा के अनुरूप नहीं होने को लेकर पहले भी निर्देश दिये गये थे। इसके बावजूद अपेक्षित सुधार नहीं होने की बात आदेश में दर्ज की गयी है।












