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गया पुलिस ने नक्सलियों के गढ़ में खोला पुस्तकालय

-गया पुलिस ने नक्सलियों के गढ़ में खोला पुस्तकालय

संवाददाता।गया।

गया के नक्सल प्रभावित इलाका डुमरिया प्रखंड अंतर्गत छकरबंधा थाना परिसर में निःशुल्क पुस्तकालय का उद्घाटन किया गया है। इस पुस्तकालय का शुभारंभ गया एसएसपी आशीष भारती ने फीता काटकर किया। इस पुस्तकालय में हाई स्कूल से लेकर बीपीएससी, यूपीएससी परीक्षाओं की तैयारी के लिए किताबें रखी गई हैं। व्यक्तिगत और जिला पुलिस की ओर से ‘पुलिस पुस्तकालय ‘ स्थापित किया गया है ताकि वैसे छात्र जो सुविधा नहीं होने के कारण बाहर जाकर तैयारी नहीं कर पाते हैं वह यहां पुलिस पुस्तकालय में आकर सुरक्षित तरीके से तैयारी कर सकें।
इस दौरान सैकड़ों जरूरतमंदों के बीच एसएसपी ने कंबल का वितरण किया गया। इसके साथ ही गया से आए चिकित्सकों के द्वारा विभिन्न बीमारियों से ग्रसित मरीजों को निशुल्क इलाज किया गया और उन्हें दवाइयां भी गई। वही इस दौरान इस बार मैट्रिक में अच्छे अंक से सफल मेधावी बच्चों के बीच साइकिल और सिलाई मशीन का वितरण किया गया। जिसमें चार छात्र और चार छात्राएं शामिल है। इसी दौरान स्कूल के बच्चियों ने स्वागत गीत गाते हुए अतिथियों को स्वागत किया तथा नशा मुक्त एवं बाल विवाह पर गीत संगीत प्रस्तुत कर लोगों को जागरू किया।


कार्यक्रम के बाद छकरबंधा सीआरपीएफ 47 बटालियन कैंप में बच्चों के बीच कबड्डी खेलकूद प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, वही कबड्डी में विजेताओं खिलाड़ियों को एसएसपी ने शील्ड और मेडल देकर उन्हें सम्मानित किया। इस मौके पर इमामगंज एसडीपीओ अमित कुमार, छकरबंधा, मैगरा थाना, बोधिबिघा थाना, छकरबंधा पंचायत के मुखिया इम्तियाज़ सहित अन्य पुलिस अधिकारियों एवं सैकड़ों की संख्या लोग मौजूद थे।
इस संबंध में गया एसएसपी आशीष भारती ने बताया कि छकरबंधा गांव में स्थित नक्सल थाना भवन में एक निःशुल्क पुस्तकालय का उद्घाटन किया गया है। इस में हाई स्कूल से लेकर बीपीएससी, यूपीएससी परीक्षाओं की तैयारी के लिए किताबें रखी गई हैं। व्यक्तिगत और जिला पुलिस की ओर से ‘पुलिस पुस्तकालय’ स्थापित किया गया है ताकि वैसे छात्र जो सुविधा नहीं होने के कारण बाहर जाकर तैयारी नहीं कर पाते हैं वही यहां पुलिस पुस्तकालय में आकर सुरक्षित तरीके से तैयारी कर सकेंगे।
उन्होंने कहा कि पुलिस पुस्तकालय में हर छात्र छात्राएं आकर पढ़ सकते हैं। नक्सली के बच्चे भी पढ़ें, वह पढ़ेंगे तभी समाज से भटके हुए उनके पिता, भाई परिवार के लोग मुख्यधारा में जुड़ेंगे, वैसे भी यहां नक्सली अब नहीं के बराबर हैं लेकिन जो हैं वह मुख्यधारा में जुड़े, अपने बच्चों को शिक्षित बनाएं।