-संविधान दिवस को जसपा नेपाल धनुषा ने विरोध दिवस के रूप में मनाया
जनकपुरधाम/मिश्री लाल मधुकर। जनता समाजवादी पार्टी (जसपा) नेपाल धनुषा ने असोज 3 को संविधान दिवस के बजाय विरोध दिवस के रूप में मनाया। शनिवार को जनकपुरधाम में ‘मौजूदा संविधान की मूल विषयवस्तु और संविधान में बदलाव की आवश्यकता’ विषय पर बातचीत कार्यक्रम आयोजित कर पार्टी नेताओं ने संविधान में संशोधन की मांग उठाई।
कार्यक्रम में जसपा नेपाल के नेताओं ने कहा कि संविधान में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां शामिल हैं, लेकिन मधेसी, राष्ट्रीयताओं और अन्य समुदायों के अधिकार एवं पहचान से जुड़े मामलों में अभी भी भेदभाव की स्थिति बनी हुई है। पार्टी का कहना है कि कार्यपालिका, न्यायपालिका, व्यवस्थापिका और सेना में मधेसी समुदाय को समान अधिकार और प्रतिनिधित्व नहीं मिला है।

जसपा नेपाल के उपाध्यक्ष परमेश्वर साह ने कहा कि जब तक संविधान में आवश्यक बदलाव नहीं किए जाते, तब तक वे संविधान से जुड़ाव महसूस नहीं कर पाएंगे। उन्होंने कहा कि असोज 3 उनके लिए अब भी काला दिन है। पार्टी ने कहा कि संविधान में भेदभावपूर्ण और गलत प्रावधानों में संशोधन के लिए बहस और संवाद के माध्यम से दबाव बनाया जाएगा।
बताया गया कि इससे पहले जसपा नेपाल असोज 3 को काले दिन के रूप में मनाता रहा है। इस वर्ष पार्टी के केंद्रीय निर्णय के अनुसार देशभर की जिला कमेटियों को बातचीत, बहस और सेमिनार आयोजित करने का निर्देश दिया गया था। इसी के तहत धनुषा में बातचीत कार्यक्रम आयोजित किया गया।
पशुपति यादव की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में पूर्व विधायक शैलेंद्र यादव, केंद्रीय सदस्य जीतेंद्र यादव, पूर्व मेयर राम ज्ञान मंडल, संजय चौधरी सहित कई नेताओं ने अपने विचार रखे।












