-दिघरा गांव में बंदर का आतंक खत्म, छह घंटे की मशक्कत के बाद वन विभाग ने पकड़ा
मुजफ्फरपुर। सदर थाना क्षेत्र के दिघरा गांव में पिछले तीन दिनों से आतंक का पर्याय बने आक्रामक बंदर को आखिरकार वन विभाग की टीम ने छह घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद जाल और पिंजरे की मदद से पकड़ लिया। बंदर के पकड़े जाने के बाद ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। बताया गया कि पिछले तीन दिनों में बंदर ने करीब 20 ग्रामीणों पर हमला कर उन्हें काटकर गंभीर रूप से जख्मी कर दिया था। लगातार हो रहे हमलों से गांव में दहशत का माहौल बना हुआ था। बच्चे और बुजुर्ग घरों से बाहर निकलने से भी डर रहे थे।
हालात की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय सरपंच चंदन कुमार ने वन विभाग के वरीय अधिकारियों को मामले की जानकारी दी। सूचना मिलते ही वन विभाग की विशेष रेस्क्यू टीम आवश्यक जाल और उपकरणों के साथ दिघरा गांव पहुंची। बंदर लगातार छतों और पेड़ों पर अपनी जगह बदल रहा था, जिसके कारण उसे पकड़ने में रेस्क्यू टीम को काफी मशक्कत करनी पड़ी। करीब छह घंटे तक चले अभियान के बाद टीम ने बंदर को सुरक्षित काबू में कर लिया और अपने साथ ले गई।

बंदर के पकड़े जाने से ग्रामीणों को तो राहत मिली, लेकिन हमले में घायल लोगों को सदर अस्पताल में स्वास्थ्य व्यवस्था की परेशानी का सामना करना पड़ा। बंदर के काटने से घायल करीब 20 ग्रामीण प्राथमिक उपचार और एंटी-रेबीज वैक्सीन लगवाने सदर अस्पताल पहुंचे। ग्रामीणों के अनुसार, अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में एंटी-रेबीज वैक्सीन उपलब्ध नहीं थी। इसके बाद घायलों के परिजनों को बाहर की निजी दवा दुकानों से महंगे दाम पर रेबीज का इंजेक्शन खरीदना पड़ा।
सरकारी अस्पताल में जरूरी वैक्सीन उपलब्ध नहीं होने को लेकर घायलों के परिजनों में आक्रोश देखा गया। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग से अस्पताल में एंटी-रेबीज वैक्सीन समेत जरूरी दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की।












