-रसुवा में हाइड्रोपावर सुरंगों में करीब 600 कामगारों के फंसे होने की खबर, चार दिन बाद भी रेस्क्यू चुनौतीपूर्ण
जनकपुरधाम/मिश्री लाल मधुकर। नेपाल के रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी में आई भीषण बाढ़ के बाद त्रिशूली कॉरिडोर स्थित विभिन्न हाइड्रोपावर परियोजनाओं की सुरंगों में सैकड़ों कामगारों के फंसे होने की सूचना है। बताया जा रहा है कि करीब चार दिनों से मजदूर, इंजीनियर और तकनीशियन सुरंगों के अंदर फंसे हैं। सुरंगों में पानी, कीचड़ और गाद भर जाने से राहत एवं बचाव कार्य बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया है।
प्राइवेट पावर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (IPPAN) के अनुसार, त्रिशूली कॉरिडोर की 11 हाइड्रोपावर परियोजनाओं से जुड़े कुल 898 कर्मचारी और कामगार अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। इनमें करीब 400 लोगों के 216 मेगावाट क्षमता वाले अपर त्रिशूली-1 परियोजना की सुरंग और हेडवर्क्स क्षेत्र में फंसे होने की आशंका है। वहीं 60 मेगावाट की अपर त्रिशूली-3 ‘ए’ परियोजना के अंडरग्राउंड पावर हाउस में 42 लोगों, लांगटांग खोला परियोजना की सुरंग में करीब 25 लोगों और चिलिमे हाइड्रोपावर की सुरंग में छह कर्मचारियों के फंसे होने की जानकारी सामने आई है।
घटना के चार दिन बाद भी सुरंगों में फंसे लोगों तक पहुंचना बचाव एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। परियोजना संचालकों का आरोप है कि भारी उपकरण, विशेषज्ञ मानव संसाधन और आधुनिक तकनीकी संसाधन समय पर घटनास्थल तक नहीं पहुंच सके हैं। अपर त्रिशूली-3 ‘ए’ परियोजना में करीब 20 फीट तक खुदाई करने के प्रयास की जानकारी है, जबकि कई अन्य सुरंगों में पानी और गाद के कारण बचाव कार्य बाधित है।

चिलिमे सुरंग में पहुंची पर्वतारोहण एवं बचाव टीम ने भी विशेष उपकरणों के अभाव में अभियान को कठिन बताया है। बताया गया है कि सुरंग के करीब 100 मीटर अंदर तक कीचड़ और गाद भर गई है, जिससे सामान्य उपकरणों के जरिए फंसे लोगों तक पहुंचना संभव नहीं हो पा रहा है।
इस बीच भारत और चीन से विशेषज्ञ दलों के नेपाल पहुंचने से बचाव की उम्मीद बढ़ी है। हालांकि, स्थानीय स्तर पर सरकारी एजेंसियों और परियोजना संचालकों के बीच समन्वय की कमी को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। परियोजना प्रमोटरों और प्रभावित परिवारों ने सरकार से बचाव अभियान में तेजी लाने तथा आधुनिक उपकरणों और विशेषज्ञ टीमों को तत्काल प्रभावित सुरंगों में उतारने की मांग की है।
सुरंगों के भीतर ऑक्सीजन, भोजन, पानी और तापमान को लेकर भी चिंता जताई जा रही है। हालांकि फंसे लोगों की वास्तविक संख्या और उनकी मौजूदा स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने की सूचना ने चिंता बढ़ा दी है। बचाव अभियान में हर घंटे की देरी फंसे लोगों के लिए खतरा बढ़ा सकती है। ऐसे में नेपाल सरकार और बचाव एजेंसियों के सामने सुरंगों में फंसे लोगों तक जल्द से जल्द सुरक्षित पहुंच बनाना सबसे बड़ी चुनौती है।











