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प्रेम प्रसंग और ‘हनीमून किडनैपिंग’ के बढ़ते मामलों ने बढ़ाई पुलिस की चिंता

-प्रेम प्रसंग और ‘हनीमून किडनैपिंग’ के बढ़ते मामलों ने बढ़ाई पुलिस की चिंता

मुजफ्फरपुर। जिले में प्रेम प्रसंग और शादी की नीयत से युवतियों के घर से चले जाने के बढ़ते मामलों ने जिला पुलिस की परेशानी बढ़ा दी है। परिजनों की ओर से थाने में गुमशुदगी या अपहरण की प्राथमिकी दर्ज कराई जाती है। शिकायत के दौरान परिजनों की स्थिति ऐसी होती है कि पुलिस को शुरुआत में मामला गंभीर अपहरण का प्रतीत होता है। पुलिस सामान्य अपहरण की धारा में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू करती है। इसके बाद जब गायब युवती के मोबाइल का सीडीआर और टावर लोकेशन खंगाला जाता है तो कई मामलों में कहानी पूरी तरह अलग सामने आती है।
मोबाइल लोकेशन के आधार पर पुलिस युवती की बरामदगी के लिए दूसरे जिले और कई बार दूसरे राज्य तक पहुंचती है। बरामदगी के बाद कई मामलों में युवती के माथे पर सिंदूर और गले में मंगलसूत्र मिलता है। इसके बाद पुलिस के सामने अपहरण की शिकायत से अलग तस्वीर सामने आती है। कोर्ट में पेशी के दौरान युवती अपने बयान में अपहरण से इनकार कर प्रेमी के साथ रहने की बात कहती है। बालिग होने की स्थिति में वह अपनी उम्र का प्रमाण भी कोर्ट के सामने प्रस्तुत करती है। कोर्ट के आदेश के बाद पुलिस उसे उसके प्रेमी के साथ भेज देती है।
नाबालिग युवतियों के मामलों में स्थिति अलग होती है। कई बार नाबालिग अपने कथित प्रेमी के साथ जाने की जिद करती है, लेकिन कानूनी प्रावधानों के कारण उसे कोर्ट के आदेश पर बालिका गृह भेज दिया जाता है। इस तरह पुलिस के सामने परिजनों की शिकायत, युवती की बरामदगी और कोर्ट में दिए गए बयान के बीच अलग-अलग परिस्थितियों से निपटने की चुनौती रहती है।
जिले में दर्ज मामलों के आंकड़े भी इस समस्या की गंभीरता की ओर इशारा करते हैं। वर्ष 2020 में प्रेम प्रसंग और शादी की नीयत से अपहरण के 620 मामले दर्ज किए गए थे। वर्ष 2021 में यह संख्या बढ़कर 632 हो गई। वर्ष 2022 में जनवरी से जून तक ही 284 लड़कियों के शादी की नीयत से घर से चले जाने को लेकर प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
थानों में दर्ज मामलों में गायब होने वाली युवतियों की उम्र भी पुलिस के लिए चिंता का विषय है। अधिकांश मामलों में उम्र 15 से 25 वर्ष के बीच होती है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार करीब 40 प्रतिशत मामले इसी आयु वर्ग से जुड़े हैं। 30 वर्ष से अधिक उम्र के युवक-युवतियों की संख्या अपेक्षाकृत कम है।


जिले में हर महीने प्रेम प्रसंग और शादी की नीयत से अपहरण के औसतन 40 से 45 मामले दर्ज किए जाते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में पारू अंचल के तीन थानों और कटरा थाना क्षेत्र में ऐसे मामले अधिक सामने आते हैं। शहरी क्षेत्र में अहियापुर, नगर और सदर थाने में इन मामलों की संख्या अधिक रही है। वर्ष 2021 में अकेले अहियापुर थाने में 95, नगर थाने में 82 और सदर थाने में 75 मामले दर्ज किए गए थे। मैट्रिक और इंटर की परीक्षा के समय तथा शादी के मौसम में ऐसे मामलों की संख्या बढ़ जाती है।
उपलब्ध छह महीने के आंकड़ों के अनुसार जनवरी में 30, फरवरी में 39, मार्च में 53, अप्रैल में 50, मई में 53 और जून में 59 मामले दर्ज हुए। जून में ऐसे मामलों की संख्या सबसे अधिक रही। आंकड़ों से साफ है कि महीने दर महीने मामलों में उतार-चढ़ाव के बावजूद प्रेम प्रसंग और शादी की नीयत से घर से जाने के मामले पुलिस के लिए लगातार चुनौती बने हुए हैं।
अलग-अलग समुदाय से जुड़े प्रेमी युगलों के मामलों में पुलिस की परेशानी और बढ़ जाती है। पुलिस जहां युवती की बरामदगी के लिए दूसरे जिले या राज्य में भागदौड़ करती है, वहीं कुछ लोग मामले को सामुदायिक रंग देने की कोशिश करते हैं। इससे कानून-व्यवस्था की चुनौती भी पैदा हो जाती है। ऐसे मामलों में पुलिस को युवती की सुरक्षित बरामदगी के साथ-साथ दोनों पक्षों के बीच तनाव को नियंत्रित करने पर भी ध्यान देना पड़ता है।
पुलिस के लिए ऐसे मामलों में सबसे महत्वपूर्ण मोबाइल सीडीआर, टावर लोकेशन, उम्र संबंधी दस्तावेज और कोर्ट में युवती का बयान होता है। कई मामलों में अपहरण की शिकायत से शुरू हुई जांच अंततः प्रेम प्रसंग और स्वेच्छा से शादी करने की कहानी में बदल जाती है। यही वजह है कि बढ़ते मामलों ने पुलिस के सामने जांच के साथ-साथ सामाजिक और कानूनी स्तर पर भी नई चुनौती खड़ी कर दी है।