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CBSE की नई तीन-भाषा नीति से विद्यार्थियों को मिलेगा बहुभाषी भविष्य का आधार

-CBSE की नई तीन-भाषा नीति से विद्यार्थियों को मिलेगा बहुभाषी भविष्य का आधार

मातृभाषा, भारतीय भाषाओं और वैश्विक अवसरों को जोड़ने वाली पहल : संतोष कुमार

नई दिल्ली/मुजफ्फरपुर। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) द्वारा लागू की जा रही नई तीन-भाषा नीति को शिक्षा जगत में विद्यार्थियों के समग्र विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस नीति का उद्देश्य विद्यार्थियों में बहुभाषिक क्षमता विकसित करना, मातृभाषा एवं भारतीय भाषाओं के प्रति सम्मान बढ़ाना तथा उन्हें राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर बेहतर अवसरों के लिए तैयार करना है।

इस संबंध में सरस्वती विद्या मंदिर, दौलतपुर जमालपुर के उप प्रधानाचार्य एवं विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान, उत्तर-पूर्व क्षेत्र के क्षेत्रीय सहसंयोजक (प्रचार विभाग) संतोष कुमार ने कहा कि नई शिक्षा नीति के अंतर्गत CBSE की तीन-भाषा व्यवस्था विद्यार्थियों को भाषाई, सांस्कृतिक और बौद्धिक रूप से समृद्ध बनाएगी। उन्होंने बताया कि इस व्यवस्था में विद्यार्थियों को तीन भाषाओं का अध्ययन करना होगा, जिनमें कम-से-कम दो भारतीय भाषाएं होंगी।

उन्होंने स्पष्ट किया कि तीसरी भाषा (R3) के लिए कक्षा 10 में अलग से बोर्ड परीक्षा आयोजित नहीं होगी। इसका मूल्यांकन विद्यालय स्तर पर आंतरिक रूप से किया जाएगा, जिससे विद्यार्थियों पर अतिरिक्त परीक्षा का दबाव नहीं पड़ेगा।

संतोष कुमार ने कहा कि इस नीति में किसी विशेष भाषा को थोपने की बात नहीं है। CBSE पहले से 45 से अधिक भाषाओं का विकल्प उपलब्ध करा रहा है और विद्यार्थी अपनी रुचि एवं आवश्यकता के अनुसार भाषा का चयन कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि बहुभाषी शिक्षा बच्चों की सोचने-समझने की क्षमता, स्मरण शक्ति, संवाद कौशल और सामाजिक संवेदनशीलता को बढ़ाती है।

उन्होंने आगे कहा कि मातृभाषा एवं स्थानीय भाषाओं से जुड़ाव बच्चों की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करता है और उनमें आत्मगौरव की भावना विकसित होती है। साथ ही कई भाषाओं का ज्ञान भविष्य में उच्च शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं और वैश्विक रोजगार के अवसरों में भी सहायक सिद्ध होगा।

उन्होंने अभिभावकों एवं शिक्षकों से अपील की कि वे इस नीति को सकारात्मक दृष्टिकोण से देखें और बच्चों को विभिन्न भाषाओं के अध्ययन के लिए प्रोत्साहित करें, ताकि वे “अधिक भाषाएं, अधिक समझ और बेहतर भविष्य” के लक्ष्य को साकार कर सकें।