-यूपी के मेगा एक्सप्रेसवे बने ‘गेम चेंजर’, बिहार से दिल्ली की दूरी अब और हुई कम
लखनऊ/पटना।ब्यूरो।
उत्तर प्रदेश में तेजी से बन रहे और हाल ही में उद्घाटित मेगा एक्सप्रेसवे अब केवल सड़क परियोजनाएं नहीं रह गई हैं, बल्कि ये बिहार और दिल्ली के बीच दूरी को कम करने वाली नई सियासी और आर्थिक धमनियों के रूप में उभर रहे हैं। प्रधानमंत्री Narendra Modi द्वारा 29 अप्रैल को उद्घाटित 594 किलोमीटर लंबे Ganga Expressway ने दक्षिण बिहार के कैमूर, रोहतास, औरंगाबाद और गया जैसे जिलों के लिए राजधानी दिल्ली तक पहुंच को बेहद आसान बना दिया है।
यह एक्सप्रेसवे वाराणसी और प्रयागराज से होते हुए मेरठ तक सीधा संपर्क स्थापित करता है, जहां से दिल्ली की दूरी तेजी से तय की जा सकती है। 120 किमी प्रति घंटे तक की रफ्तार से चलने वाली यह सड़क यात्रा को न केवल तेज, बल्कि पहले के मुकाबले अधिक सुगम और सुरक्षित बना रही है। गया से दिल्ली तक का लंबा और थकाऊ सफर अब पहले की तुलना में काफी आसान हो गया है।
इसी कड़ी में निर्माणाधीन Shamli-Gorakhpur Expressway उत्तर बिहार के लिए नई उम्मीदें लेकर आ रहा है। पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी और मोतिहारी जैसे जिलों के लोगों के लिए यह कॉरिडोर भविष्य में दिल्ली की दूरी को लगभग 12 घंटे में समेट सकता है। करीब 700 किलोमीटर लंबे इस 6-लेन एक्सप्रेसवे को आगे चलकर 8-लेन तक विस्तारित करने की योजना है। इसे National Highways Authority of India (NHAI) द्वारा भारतमाला परियोजना के तहत विकसित किया जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजनाएं बिहार के लिए सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार नहीं, बल्कि रोजगार, पलायन और व्यापार की दिशा बदलने वाला बड़ा बदलाव साबित होंगी। बेतिया से दिल्ली की यात्रा अब विभिन्न एक्सप्रेसवे नेटवर्क—गोरखपुर-सिलीगुड़ी कॉरिडोर, शामली-गोरखपुर एक्सप्रेसवे और दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे—के जरिए लगभग 15 घंटे में पूरी की जा सकेगी।
इन सभी एक्सप्रेसवे की खासियत इनका एक्सेस-कंट्रोल्ड सिस्टम है, जिसमें प्रवेश और निकास के निर्धारित पॉइंट होते हैं। इससे न केवल यातायात सुगम होता है, बल्कि दुर्घटनाओं की संभावना भी कम होती है।
पूर्वी भारत के पश्चिम चंपारण से लेकर किशनगंज तक के आठ जिलों के लिए यह हाईवे नेटवर्क किसी लाइफलाइन से कम नहीं माना जा रहा है। खासकर उन लाखों युवाओं के लिए, जो रोजगार की तलाश में दिल्ली, हरियाणा और पंजाब की ओर जाते हैं, ये सड़कें उनके सफर को आसान और भविष्य को बेहतर बनाने वाली साबित हो सकती हैं।
कुल मिलाकर, एक्सप्रेसवे का यह जाल अब केवल कंक्रीट का नेटवर्क नहीं रहा, बल्कि बिहार के सामाजिक-आर्थिक नक्शे को बदलने वाली नई रफ्तार बन चुका है—जहां दिल्ली अब सचमुच दूर नहीं रही।












