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सामाजिक सद्भाव व एकता का केन्द्र है मधुछपरा स्थित सर्वमंगला शक्तिपीठ

-सामाजिक सद्भाव व एकता का केन्द्र है मधुछपरा स्थित सर्वमंगला शक्तिपीठ

मोतिहारी, राजन द्विवेदी।

पीपराकोठी प्रखंड के मधुछपरा ग्राम में अवस्थित माँ सर्वमंगला शक्तिपीठ श्रद्धालुओं की आस्था का केन्द्र है। मोतिहारी स्थित आर्षविद्या शिक्षण प्रशिक्षण सेवा संस्थान-वेद विद्यालय के प्राचार्य सुशील कुमार पाण्डेय के अनुसार इस शक्तिपीठ की यह विशेषता है कि नवरात्र के अलावा अन्य दिनों में भी ग्रामीणों के अतिरिक्त दूर दराज से श्रद्धालु आते रहते हैं। यहाँ सालों भर दैनिक पूजा-अर्चना तो होती ही है साथ में अष्टयाम,लखराँव तथा अन्य अनुष्ठान आदि सम्पन्न होते रहते हैं। यहाँ विगत कई वर्षों से शारदीय (आश्विन) नवरात्र एवं वासंतिक (चैत्र) नवरात्र दोनों में विशेष पूजा-अर्चना होती है। इस वर्ष भी यहाँ विद्वान आचार्य आशीष कुमार उपाध्याय के आचार्यत्व व प्रियांशु तिवारी के सहायक आचार्यत्व तथा आलोक पाण्डेय,झुन्नु कुमार ओझा,राजू ठाकुर,चंचल पाण्डेय,कुन्दन पाण्डेय,रामदेव भगत,झुन्ना ठाकुर आदि कार्यकर्ताओं के सकारात्मक प्रयास एवं ग्रामीण जनता के समर्पण व सहयोग से शारदीय नवरात्र पूजन का भव्य आयोजन किया गया है।
गाँव के जानकार लोगों में योगेन्द्र पाण्डेय,प्रो•देवेन्द्रनाथ पाण्डेय,सुभाष पाण्डेय,दीपक पाण्डेय,रवीन्द्रनाथ पाण्डेय,ब्रजकिशोर पाण्डेय,राजेन्द्र पाण्डेय,दिनेश पाण्डेय,बलीराम पाण्डेय,नवलकिशोर पाण्डेय,संदेश्वर पाण्डेय,दिवाकर पाण्डेय,कामेश्वर पाण्डेय,रत्नेश्वर ओझा,उमाशंकर बैठा,रघुनाथ ठाकुर,वकील महतो आदि लोगों के अनुसार इस सिद्धपीठ मंदिर का इतिहास सैकड़ों साल पुराना है। ज्ञातव्य है कि लगभग डेढ़ सौ साल पहले गाँव से कुछ दूर निर्जन बँसवारी के जंगल में चार विशालकाय पीपल वृक्ष के बीच में माँ दुर्गा की सात पिंडियाँ अवस्थित थीं,जहाँ श्रद्धालु पूजा करने जाते थे।

कालांतर में इन पिंडियों को क्षेत्रीय लोगों के द्वारा वहाँ से स्थानांतरित करते हुए सड़क के किनारे खपरैल का छोटा सा मंदिर बनाकर स्थापित किया गया। वर्तमान समय में उसी स्थान पर स्थानीय लोगों के सहयोग से इस प्राचीन मंदिर का भव्य नव निर्माण कराया गया है। साथ ही उसी प्रांगण में एक और दो मंजिला मंदिर निर्माणाधीन है,जिसमें शिव परिवार,राम दरबार,राधा-कृष्ण एवं नरसिंह भगवान की प्रतिमा स्थापित की जाएगी।
प्राचार्य पाण्डेय ने बताया कि इस सिद्धपीठ मंदिर में क्षेत्र के हिन्दुओं के साथ साथ मुस्लिम समुदाय के लोग भी दर्शन करने आते हैं तथा पूजन व मंदिर निर्माण में यथाशक्ति आर्थिक,मानसिक और शारीरिक सहयोग भी करते हैं। अतः यह शक्तिपीठ अवश्य ही सामाजिक सद्भाव व एकता का केन्द्र है। इस शक्तिपीठ में माँ सर्वमंगला की पूजा व उपासना श्रद्धा एवं विश्वास के साथ करने से “यं यं चिन्तयते कामं तं तं प्राप्नोति निश्चितम्ʼʼ के अनुसार निश्चित ही समस्त कामनाओं की सिद्धि होती है।