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शिक्षा है भारतीय संस्कृति की पवित्र प्रक्रिया : डॉ किशन

-भारतीय संस्कृति में शिक्षा को पवित्र प्रक्रिया माना गया है-डॉ किशन वीर सिंह शाक्य

भागलपुर से शशि भूषण मिश्र की रिपोर्ट।

गणपत राय सलारपुरिया सरस्वती विद्या मंदिर नरगाकोठी के प्रांगण में चल रहे भारती शिक्षा समिति एवं शिशु शिक्षा समिति प्रबंध समिति द्वारा आयोजित नवीन आचार्य प्रशिक्षण वर्ग ,सेवा स्थायित्व वर्ग एवं लेखा प्रशिक्षण वर्ग के तीसरे दिन का प्रारंभ अखिल भारतीय मंत्री डॉ किशन वीर सिंह शाक्य ,क्षेत्रीय संगठन मंत्री ख्यालीराम, प्रदेश सचिव प्रदीप कुमार कुशवाहा ,वर्ग के प्रधानाचार्य सतीश सिंह एवं नालंदा के विभाग निरीक्षक राकेश नारायणम अम्बष्ट द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया गया। डॉ किशन वीर सिंह शाक्य ने कहा कि विद्या भारती का पंचपदी शिक्षण पद्धति शिक्षा की सर्वोत्तम पद्धति है। जीवन जिस प्रकार से चलता है उसी प्रकार शिक्षा भी चलती है। किसको, क्या, क्यों, कैसे इन चारों का समाहित रूप से शिक्षा प्रदान करना पंचपदी है। पंचपदी द्वारा अधिती, बोध, अभ्यास, प्रयोग, प्रसार के माध्यम से बालकों को शिक्षित करने पर विस्तृत चर्चा किया गया। जो आचार्य ने इस पंचपदी शिक्षण पद्धति को अपना लिया वह आचार्य समाज में आदर्श आचार्य के रूप में जाना जाएगा। जीवन के प्रत्येक अनुभव को शिक्षा कहा जा सकता है। शिक्षा मनुष्य के सर्वांगीण विकास अर्थात शरीर मन बुद्धि और आत्मा का विकास है। शिक्षा का आधार जीवन दर्शन है। शिक्षक सबसे ज्यादा आदरणीय था और है। भारतीय संस्कृति में शिक्षा को पवित्र प्रक्रिया माना गया है।
क्षेत्रीय संगठन मंत्री ख्यालीराम ने कहा कि भारतीय संस्कृति धर्म एवं जीवन आदर्शों के अनुरूप बालकों के चरित्र का निर्माण करना विद्या भारती की शिक्षा प्रणाली का मुख्य लक्ष्य है।


प्रदेश सचिव प्रदीप कुमार कुशवाहा ने कहा कि मनुष्य के भीतर समस्त ज्ञान अवस्थित है जरूरत है उसे जागृत करने के लिए उपयुक्त वातावरण निर्माण करने की।
आज का प्रशिक्षण वर्ग 5 सत्रों में संपन्न हुआ अतिथि परिचय वर्ग के प्रधानाचार्य सतीश सिंह द्वारा किया गया।
इस अवसर पर उमाशंकर पोद्दार, ब्रह्मदेव प्रसाद, डॉ रमेश मणि पाठक, विनोद कुमार, मिथिलेश सिंह, रामचंद्र आर्य ,राजू जी ,बासुकी यादव, वीरेंद्र कुमार ,परमेश्वर कुमार, गंगा चौधरी, उप प्रधानाचार्य अशोक कुमार मिश्र,शिशु मंदिर प्रभारी प्रधानाचार्य राजेश कुमार,डॉक्टर संजीव झा, आभाष कुमार, राम रतन सिंह ,पुष्कर झा,अमर ज्योति, शशि भूषण मिश्र एवं प्रशिक्षण वर्ग में भाग ले रहे प्रशिक्षणार्थी आचार्य उपस्थित थे।