-बिहार के शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए चंपारण से बजी डुगडुगी
सम्वाददाता। पटना/चंपारण।
बिहार में उच्च शिक्षा सही मायने में प्राप्त करना बड़ी समस्या का रूप ले रखा है। इस समस्या का समाधान करना भी सरकार के लिए बड़ी चुनौती है। ताकि बिहार के बच्चे उच्च शिक्षा के लिए अन्य प्रांतों में पलायन न करें। वहीं खास कर मध्यम वर्ग के अभिभावकों के लिए बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाने के लिए बाहर भेजने में आर्थिक रूप से कई झंझावात को झेलना पड़ रहा है। इसी जद्दोजहद के बीच चंपारण के मोतिहारी से एक बड़ी पहल चंपारण नागरिक मंच ने करते हुए शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए डुगडुगी बजा दी है। हालांकि इसके पूर्व शिक्षा व्यवस्था में समस्या के कारणों को भी खंगाले। वहीं आज चंपारण के वरिष्ठ बुद्धिजीवियों के बीच बैठ कर बिहार की शिक्षा, समस्या और समाधान के लिए परिचर्चा भी की। इस परिचर्चा में यह बात साफ तौर पर सामने आया कि बच्चों को कालेज तक भेजने में अभिभावकों को जवाबदेह बनाना होगा। वहीं छात्रों को अपने शिक्षा के अधिकार के लिए स्कूल और कालेज में जाकर पढ़ाई करने और कराने के लिए मुखर होकर आगे आना होगा। साथ ही कोचिंग की चकाचौंध से अभिभावकों को अपने बच्चों को दूर रखें। वहीं नागरिक मंच कोचिंग में पढ़ाने वाले शिक्षकों की काबिलियत भी परेखेगा। कालेज में नामांकन और नामांकन के बाद क्लासों में छात्रों की उपस्थिति को भी जानेगा। किसी तरह की शिक्षा व्यवस्था में उत्पन्न बाधा और बाधकों के खिलाफ चंपारण नागरिक मंच डुगडुगी बजा देगा।

बता दें कि स्थानीय भूमिहार ब्राह्मण छात्रावास के सभागार में इस समस्या को लेकर परिचर्चा हुई। जिसकी अध्यक्षता चंपारण नागरिक मंच के संस्थापक अजय कुमार सिन्हा ने तथा संचालन मंच के महासचिव आलोक चन्द्र ने किया वहीं विषय प्रवेश अधिवक्ता डॉ प्रणव प्रियदर्शी ने किया। परिचर्चा में विषय को रखते हुए मंच के अध्यक्ष अधिवक्ता विनोद कुमार दूबे ने कहा कि बिहार को उच्च शिक्षा के क्षेत्र में केंद्र सरकार तथा राज्य सरकार द्वारा लगातार उपेक्षित किया गया। जहां एकओर केंद्र सरकार ने देश के अन्य राज्यों में वर्ष 2005 से 2008 के बीच 7 अखिल भारतीय विज्ञान अनुसंधान संस्थान तथा होमी भाभा राष्ट्रीय संस्थान के अंतर्गत 11 विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी अनुसंधान संस्थान खुले वहीं बिहार को एक भी ऐसी संस्थान नहीं मिला। परिचर्चा को डॉ नागमणि, वीरेंद्र जालान, मुकेश कुमार पांडे, संजय कुमार, सतीश टंडन, विभाष रंजन पांडे, अमिता निधि, मनीष शेखर, मीना द्विवेदी एवं वरिष्ठ पत्रकार और समाजसेवी राजन दत्त द्विवेदी ने अपना विचार रखा। अंत में एलएनडी महाविद्यालय के प्राचार्य अरुण कुमार ने कहां यदि बच्चे और उनके अभिभावक जागरूक हो जाएं और वह महाविद्यालयों में जाने लगे तो अपनी सीमित क्षमता के बावजूद महाविद्यालयों में वर्ग संचालन होने लगेगा। परिचर्चा में शशिभूषण पटेल राकेश रोशन सुनील कुमार तिवारी मंजय कुमार मिश्रा विजय कुमार उपाध्याय जितेश कुमार मिश्र संजय उपाध्याय राज किशोर मिश्र राकेश कुमार मिथुन कुमार इत्यादि सामाजिक कार्यकर्ता एवं समाज के दर्जनों प्रबुद्ध व्यक्ति ने भाग लिया।











