-30 मिनट में दो महिलाओं की मौत, शव ले जाने को नहीं मिला वाहन
-एसकेएमसीएच में स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल
मुजफ्फरपुर। श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (एसकेएमसीएच) के इमरजेंसी वार्ड में गुरुवार को स्वास्थ्य व्यवस्था और मानवीय संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए। अस्पताल परिसर में महज 30 मिनट के भीतर दो महिलाओं की मौत हो गई। आरोप है कि समय पर समुचित इलाज नहीं मिलने से दोनों मरीजों ने दम तोड़ दिया। वहीं मौत के बाद शव ले जाने के लिए अस्पताल की ओर से वाहन उपलब्ध नहीं कराए जाने पर परिजन शव को ई-रिक्शा पर ले जाने को मजबूर हो गए।
जानकारी के अनुसार, मृत महिलाओं में नगर थाना क्षेत्र के जोगिया मठ निवासी नंदकिशोर महतो की पत्नी प्रमीला देवी शामिल हैं। उनकी बेटी ज्योति ने अस्पताल प्रशासन, चिकित्सकों और कर्मियों पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया है। ज्योति का कहना है कि उनकी मां को समय पर उचित उपचार नहीं मिला, जिससे उनकी मौत हो गई।
मौत के बाद परिजनों ने शव घर ले जाने के लिए अस्पताल से शव वाहन या मर्च्युरी वैन की मांग की, लेकिन कंट्रोल रूम से वाहन उपलब्ध नहीं होने की बात कही गई। काफी देर तक इंतजार के बावजूद कोई व्यवस्था नहीं होने पर परिजन मजबूर होकर शव को ई-रिक्शा पर रखकर घर ले गए। इस दौरान अस्पताल परिसर में मौजूद लोगों ने भी व्यवस्था पर नाराजगी जताई।

इसी बीच रामपुरहरि थाना क्षेत्र के जदबीर की पत्नी जयकला देवी की भी इमरजेंसी वार्ड में मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचने के बावजूद समय रहते उनका उपचार शुरू नहीं किया गया, जिसके कारण उन्होंने दम तोड़ दिया।
लगातार हुई दो मौतों के बाद अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी और चीख-पुकार का माहौल बना रहा। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था और अस्पताल प्रशासन के खिलाफ आक्रोश भी देखने को मिला।
मामले पर अस्पताल के हेल्थ मैनेजर सचिन चंचल ने कहा कि उस समय शव वाहन उपलब्ध नहीं थे। उन्होंने बताया कि अस्पताल के खर्च पर निजी एंबुलेंस उपलब्ध कराने संबंधी किसी आदेश की जानकारी उन्हें नहीं है।
वहीं एसकेएमसीएच के अधीक्षक डॉ. महेश प्रसाद ने कहा कि उन्हें इस मामले की जानकारी नहीं मिली थी। उन्होंने कहा कि कंट्रोल रूम के माध्यम से यह सुविधा उपलब्ध कराई जानी चाहिए थी। किस स्तर पर चूक हुई है, इसकी जांच कराई जाएगी और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
इस घटना ने एक बार फिर सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था और मरीजों के प्रति संवेदनशीलता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।












