-10 साल से ताले में बंद 4.6 करोड़ का अस्पताल, उद्घाटन के बाद से अब तक नहीं मिली स्वास्थ्य सुविधा
मुरौल। दीपक कुमार तिवारी।
पूर्वी अनुमंडल के मुरौल प्रखंड अंतर्गत पिलखी गजपति गांव में 4.6 करोड़ रुपये की लागत से बना राजकीय रामदुलारी मिट्ठू लाल मोरियल अस्पताल आज भी मरीजों के लिए बंद पड़ा है। लगभग 10 साल पहले भव्य तरीके से इसका उद्घाटन किया गया था, लेकिन उद्घाटन के बाद से न तो यहाँ इलाज की सुविधा शुरू हुई और न ही मरीजों की भर्ती।
अस्पताल के जर्जर हालात:
लंबे समय से उपयोग में नहीं आने के कारण अस्पताल भवन की खिड़कियां, दरवाजे और आंतरिक संरचना क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार की लापरवाही ने करोड़ों की लागत से बने इस अस्पताल को खंडहर बना दिया है।

कुछ समय चली ओपीडी, फिर बंद:
सामाजिक कार्यकर्ता श्याम किशोर ने बताया कि उद्घाटन के बाद केवल कुछ समय के लिए ओपीडी सेवा शुरू की गई थी, लेकिन महज़ तीन-चार महीने में ही उसे बंद कर दिया गया। कोरोना की तीसरी लहर के दौरान इसे अस्थायी रूप से क्वारंटीन सेंटर जरूर बनाया गया, मगर उसके बाद से यह पूरी तरह सुनसान पड़ा है।
आंदोलन की तैयारी:
श्याम किशोर ने कहा कि अगर यह अस्पताल चालू हो जाता तो मुरौल, सकरा और बंदरा प्रखंड के लोगों को इलाज के लिए एसकेएमसीएच तक नहीं जाना पड़ता। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अब समय आ गया है कि सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ता इस मुद्दे पर एकजुट होकर सड़क पर उतरें। जल्द ही इस अस्पताल को चालू कराने के लिए जनआंदोलन की रूपरेखा तैयार की जाएगी।
यह मामला न सिर्फ बिहार सरकार की योजनाओं की विफलता को उजागर करता है, बल्कि ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति गंभीर सवाल भी खड़े करता है।अब चुनाव का समय है।लोगों में नाराजगी है।चुनाव में इस जनहित के मुद्दे को लेकर भी लोग हिसाब-किताब करने के मूड में हैं।













