-स्टिंक बग और ओलावृष्टि ने उजाड़े सपने
-25 लाख के कर्ज में डूबे युवा लीची किसान
मुजफ्फरपुर। बिहार के लीची उत्पादन के लिए प्रसिद्ध मुजफ्फरपुर जिले में इस वर्ष लीची किसानों पर दोहरी मार पड़ी है। पहले प्रतिकूल मौसम और फिर स्टिंक बग कीट के हमले ने जिले की करीब 70 प्रतिशत लीची फसल को बर्बाद कर दिया। इसके बाद हुई ओलावृष्टि ने बची-खुची फसल भी नष्ट कर दी, जिससे किसानों और व्यापारियों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है।
मीनापुर प्रखंड के मानिकपुर निवासी युवा किसान एवं लीची व्यापारी दीपक कुशवाहा इस संकट के सबसे बड़े पीड़ितों में शामिल हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2019 से लीची का कारोबार कर रहे हैं, लेकिन इस तरह की स्थिति पहली बार देखने को मिली है। बेहतर उत्पादन की उम्मीद में उन्होंने इस वर्ष कर्ज लेकर करीब 30 लाख रुपये में लीची का बाग खरीदा था।

दीपक के अनुसार, मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों और स्टिंक बग कीट के प्रकोप के कारण बाग में मात्र 30 प्रतिशत लीची ही बच पाई। अभी वे इस नुकसान से उबर भी नहीं पाए थे कि अचानक हुई भीषण ओलावृष्टि ने तैयार फसल को पूरी तरह तबाह कर दिया। नतीजतन सीजन समाप्त होते-होते उन्हें करीब 25 लाख रुपये का नुकसान झेलना पड़ा और वे भारी कर्ज के बोझ तले दब गए।
दीपक ने बताया कि पहले उनके पिता लीची का व्यापार करते थे। पिता के निधन के बाद मात्र 19 वर्ष की उम्र में उन्होंने परिवार की जिम्मेदारी संभाली और इस कारोबार को आगे बढ़ाया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 में उन्हें मर्चेंट नेवी में नौकरी भी मिली थी, लेकिन पारिवारिक व्यवसाय और खेती से जुड़ाव के कारण उन्होंने नौकरी ज्वाइन नहीं की और लीची व्यापार को ही अपना भविष्य बनाया।
हालांकि इस बार के नुकसान ने उनके साथ-साथ जिले के हजारों किसानों और व्यापारियों के सपनों को झटका दिया है। किसानों का कहना है कि लीची जैसी नकदी फसल पर बढ़ते जोखिम को देखते हुए सरकार को फसल बीमा योजना लागू करनी चाहिए, ताकि प्राकृतिक आपदाओं और कीट प्रकोप से होने वाले नुकसान की भरपाई हो सके।
दीपक कुशवाहा ने सरकार से मांग करते हुए कहा कि यदि लीची किसानों के लिए फसल बीमा सुविधा शुरू की जाए तो यह किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं होगी। इससे भविष्य में होने वाले नुकसान से किसानों को राहत मिलेगी और वे आर्थिक रूप से सुरक्षित रह सकेंगे।
मुजफ्फरपुर की पहचान मानी जाने वाली लीची की फसल पर इस बार आए संकट ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। अब सभी की निगाहें सरकार की राहत और सहायता योजनाओं पर टिकी हैं।












