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सील अस्पतालों को खोलने के आदेश पर उठे सवाल, प्रमंडलीय आयुक्त ने तलब की रिपोर्ट

-सील अस्पतालों को खोलने के आदेश पर उठे सवाल, प्रमंडलीय आयुक्त ने तलब की रिपोर्ट

मुजफ्फरपुर। जिले में अवैध रूप से संचालित अस्पतालों और नर्सिंग होम के खिलाफ कार्रवाई के बाद उन्हें दोबारा खोलने के आदेश को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। अहियापुर थाना क्षेत्र में सील किए गए कुछ अस्पतालों को निबंधन, नवीकरण और फायर ऑडिट की प्रक्रिया पूरी किए बिना ही संचालन की अनुमति दिए जाने के मामले में प्रमंडलीय आयुक्त गिरिवर दयाल सिंह ने गंभीर रुख अपनाया है। उन्होंने पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट तलब करते हुए जांच के निर्देश दिए हैं।
आयुक्त ने स्वास्थ्य विभाग की जांच टीम का नेतृत्व करने वाले सदर अस्पताल के प्रभारी अधीक्षक से रिपोर्ट मांगी है। साथ ही जिलाधिकारी कुमार गौरव को अपने स्तर से आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। इसके अलावा तत्कालीन एसडीओ पूर्वी से यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि बिना वैध निबंधन, नवीकरण और फायर ऑडिट प्रमाणपत्र के किन परिस्थितियों में सील अस्पतालों को दोबारा खोलने का आदेश दिया गया।
गौरतलब है कि 4 जून को ब्रह्मपुरा स्थित प्रसाद अस्पताल के आईसीयू में आग लगने से आठ मरीजों की मौत के बाद जिले में निजी अस्पतालों की व्यापक जांच कराई गई थी। तत्कालीन एसडीओ पूर्वी तुषार कुमार के नेतृत्व में हुई जांच के दौरान मानकों का उल्लंघन करने वाले 24 अस्पतालों और नर्सिंग होम को सील कर दिया गया था। संचालकों को आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए थे।


इसके बाद 9 जुलाई को चार सदस्यीय जांच समिति ने आठ अस्पतालों को पुनः संचालन की अनुशंसा की। इस रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन एसडीओ पूर्वी ने इन अस्पतालों को सीलमुक्त करने का आदेश जारी कर दिया। हालांकि इस आदेश को लेकर इसलिए भी सवाल उठ रहे हैं क्योंकि 10 जुलाई को सामान्य प्रशासन विभाग ने आनंद उत्सव को नया एसडीओ पूर्वी नियुक्त करने की अधिसूचना जारी कर दी थी, जबकि सील हटाने के आदेश पर तत्कालीन एसडीओ तुषार कुमार के हस्ताक्षर दर्ज हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रमंडलीय आयुक्त ने सिविल सर्जन और सदर अस्पताल के प्रभारी अधीक्षक को तलब कर विस्तृत समीक्षा बैठक बुलाई है। उन्होंने अपने पत्र में कहा है कि जिन अस्पतालों का निबंधन या नवीकरण लंबित था, उन पर समयबद्ध निर्णय नहीं लिया गया, जो सरकार के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन है।
आयुक्त ने यह भी पूछा है कि एसडीओ के आदेश के बाद कितने आवेदन प्राप्त हुए, कितनों का निपटारा किया गया, कितने अभी लंबित हैं और किन आधारों पर संबंधित अस्पतालों को सीलमुक्त करने का निर्णय लिया गया।
जिन अस्पतालों और संस्थानों को सीलमुक्त किया गया, उनमें मदांता इमरजेंसी हॉस्पिटल, हेल्थ हैवन हॉस्पिटल, श्रीगंगाराम इमरजेंसी हॉस्पिटल, तिरुपति नर्सिंग होम, शांति डायग्नोस्टिक सेंटर, संतोष चाइल्ड केयर, ओम अल्ट्रासाउंड सेंटर और ग्रीन डायमंड इमरजेंसी शामिल हैं।
मामले में यह भी आरोप है कि कुछ अस्पतालों का संचालन लाइसेंस नवीनीकृत नहीं था और कुछ का फायर ऑडिट प्रमाणपत्र भी समाप्त हो चुका था। इसके बावजूद उन्हें सीलमुक्त करने के आदेश जारी कर दिए गए। अब प्रमंडलीय आयुक्त की जांच के बाद इस पूरे प्रकरण में प्रशासनिक जवाबदेही तय होने की संभावना जताई जा रही है।