-श्रीमद्भागवत कथा में गूंजा गजेन्द्र मोक्ष प्रसंग, स्वामी लक्ष्मणाचार्य ने बताई गुरु की महिमा
मुजफ्फरपुर। सकरा प्रखंड के फिरोजपुर में आयोजित श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञानयज्ञ के चौथे दिन हरिहरक्षेत्र पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी लक्ष्मणाचार्य महाराज ने श्रद्धालुओं को गजेन्द्र मोक्ष की कथा सुनाते हुए गुरु की महत्ता और भगवान की भक्ति का संदेश दिया।
अपने प्रवचन में उन्होंने कहा कि गजेन्द्र मोक्ष का प्रसंग सभी कल्पों में घटित हुआ है। उन्होंने बताया कि गजेन्द्र पूर्व जन्म में पाण्यदेश का एक राजा था, जिसे गुरु के श्राप के कारण हाथी का जन्म प्राप्त हुआ। कथा के माध्यम से उन्होंने कहा कि मनुष्य जीवन में गुरु का होना अत्यंत आवश्यक है। बिना गुरु के भवसागर से पार पाना कठिन है। संसार के सभी प्राणी, चाहे वे स्थावर-जंगम हों या कीट-पतंग, किसी न किसी रूप में गुरु के मार्गदर्शन से ही आगे बढ़ते हैं।
स्वामी जी ने कहा कि भगवान मनु ने भी वेदों के ज्ञाता, विष्णुभक्त और द्वेषरहित संत को गुरु बनाने की बात कही है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि गुरु का चयन सदैव सोच-समझकर करें, क्योंकि सही मार्गदर्शन ही जीवन को सफल बनाता है।

गजेन्द्र मोक्ष की कथा का वर्णन करते हुए उन्होंने बताया कि जब हाथी अपने परिवार के साथ सरोवर में जल पीने और जलक्रीड़ा करने गया, तभी ग्राह (मगरमच्छ) ने उसका पैर पकड़ लिया। लंबे समय तक संघर्ष के बावजूद उसके साथी उसे बचा नहीं सके। तब गजेन्द्र ने पूरी श्रद्धा से भगवान श्रीहरि का स्मरण किया। भक्त की पुकार सुनकर भगवान श्रीमन्नारायण बिना गरुड़ के ही तत्काल वहां पहुंचे और गजेन्द्र की रक्षा की।
उन्होंने कहा कि सांसारिक शक्ति और सामर्थ्य इस लोक तक ही सीमित हैं, परंतु ईश्वर की कृपा और भक्ति ही जीव का वास्तविक सहारा है। भगवान अपने भक्तों की रक्षा स्वयं करते हैं और भक्तों पर अत्याचार करने वालों का अंत निश्चित है।
प्रवचन के दौरान स्वामी लक्ष्मणाचार्य ने वामन-बलि चरित्र, भगवान श्रीराम जन्म तथा भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की कथाओं का भी रसपूर्ण वर्णन किया। कथा के उपरांत नंदोत्सव एवं बधाई कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालु भक्ति भाव में सराबोर हो गए।
कार्यक्रम के अंत में श्रीमद्भागवत जी की आरती, प्रसाद वितरण एवं विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।











