-लीची के बाद अब ‘लौंगन’ का स्वाद चखेंगे लोग, जुलाई से शुरू होगी तुड़ाई
मुजफ्फरपुर। बिहार के मुजफ्फरपुर की प्रसिद्ध शाही और चाइना लीची का सीजन समाप्त होने के बाद अब फल प्रेमियों और किसानों के लिए एक नई खुशखबरी सामने आई है। मुशहरी स्थित राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र (एनआरसीएल) में विकसित किया जा रहा विदेशी फल ‘लौंगन’ अब पूरी तरह तैयार हो रहा है। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि जुलाई के पहले सप्ताह से इसकी तुड़ाई शुरू हो जाएगी।
राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र के निदेशक डॉ. बिकास दास ने बताया कि लौंगन लीची परिवार का ही सदस्य है। इसका बाहरी छिलका भूरे रंग का होता है, जबकि अंदर का गूदा और स्वाद काफी हद तक लीची जैसा होता है। पिछले एक दशक से केंद्र के वैज्ञानिक इसकी गुणवत्ता, मिठास और पल्प की मात्रा को बेहतर बनाने के लिए लगातार शोध कर रहे हैं।
लौंगन की बढ़ती लोकप्रियता के कारण किसान भी इसकी खेती में रुचि दिखा रहे हैं। अनुसंधान केंद्र में हर साल लगभग 1,000 पौधे तैयार किए जा रहे हैं। पिछले दस वर्षों में करीब 10,000 पौधे किसानों के बीच वितरित किए जा चुके हैं। किसान केंद्र से मात्र 100 रुपये में लौंगन का पौधा प्राप्त कर सकते हैं।

इस फल की मांग अब बिहार से बाहर भी तेजी से बढ़ रही है। हाल ही में चेन्नई के किसानों को 100 पौधे भेजे गए हैं। वर्तमान में तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक जैसे राज्यों में इसकी खेती का विस्तार हो रहा है।
डॉ. बिकास दास ने बताया कि आने वाले दिनों में असम, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से भी लौंगन की खेती को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके लिए विशेष बागवानी कार्यक्रम तैयार किया जा रहा है, जिससे किसानों को लीची सीजन के बाद आय का एक नया और लाभकारी विकल्प मिल सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि लौंगन की सफल खेती से मुजफ्फरपुर की पहचान केवल लीची तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह क्षेत्र नए फलों के अनुसंधान और उत्पादन का भी प्रमुख केंद्र बन सकता है।












