–मुजफ्फरपुर में मासिक कवि गोष्ठी संपन्न, रचनाओं से सजी साहित्यिक संध्या
मुजफ्फरपुर।
रविवार को नटवर साहित्य परिषद की ओर से मासिक कवि गोष्ठी का आयोजन श्री नवयुवक समिति ट्रस्ट के अंतर्गत संचालित शहीद भगवान लाल स्मारक पुस्तकालय के सभागार में किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता उषा किरण श्रीवास्तव ने की, जबकि मंच संचालन दीनबंधु आजाद ने किया। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. जगदीश शर्मा ने प्रस्तुत किया। समाजसेवी मोहन प्रसाद सिन्हा ने अल्पविराम की घोषणा करते हुए अगली गोष्ठी अगले माह आयोजित करने की जानकारी दी।
कवि गोष्ठी में स्थानीय कवियों ने अपनी रचनाओं से साहित्यिक वातावरण को भावनाओं, देशभक्ति और सामाजिक सरोकारों से भर दिया।

प्रमुख कवियों की पंक्तियां इस प्रकार रहीं:
जगदीश शर्मा – “हमें अपने धर्म और कर्म पर बड़ा गुमान है।”
अंजनी पाठक – “बसंत के बहुरंगे रंग हैं।”
सत्येंद्र कुमार ‘सत्येन’ – “झूम-झूम के जियरा गावे।”
अशोक भारती – “जब चले जाओगे सोने तो चांदनी किस काम की।”
दीनबंधु आजाद – “पलक झुकाकर सलाम करते हैं।”
प्रमोद नारायण मिश्र – “भूलूं कैसे यह सोच न पा ऊं।”
डॉ. संगीता सागर – “समय तुम भर देते हो हर जख्म।”
रामबृक्छराम चकपुरी – “दुखी के आंसू पोछता कौन।”
मो. एहसान – “कुर्बान हुए जो भारत पर, मत भूलो कुर्बानी को।”
अंशु कुमार – “आंखों को अंगार करो, हृदय को हथियार करो।”
रेखा जायसवाल – “मन के दियरीया स्नेहिया से लहके।”
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी एवं श्रोतागण उपस्थित रहे। कवियों की प्रस्तुति पर तालियों की गूंज से सभागार देर तक गूंजता रहा।












