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शैक्षिक सत्र सुधारने को बनेगा एक्शन प्लान, सभी विश्वविद्यालयों से लोकभवन ने मांगी रिपोर्ट

-शैक्षिक सत्र सुधारने को बनेगा एक्शन प्लान, सभी विश्वविद्यालयों से लोकभवन ने मांगी रिपोर्ट

मुजफ्फरपुर। बीआरए बिहार विश्वविद्यालय सहित बिहार के सभी विश्वविद्यालयों में शैक्षिक सत्र को पटरी पर लाने के लिए एक्शन प्लान तैयार किया जाएगा। लोकभवन ने सभी विश्वविद्यालयों के कुलसचिवों को पत्र जारी कर सत्र सुधार, वित्तीय स्थिति और परीक्षा व्यवस्था को लेकर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

निर्देश के अनुसार विश्वविद्यालयों द्वारा तैयार किए गए एक्शन प्लान की समीक्षा जून महीने में की जाएगी। लोकभवन ने विश्वविद्यालयों को अकादमिक सत्र के साथ-साथ वित्तीय स्थिति को भी अपडेट रखने का निर्देश दिया है। इसके तहत अकाउंट, वेतन, पेंशन, कर्मचारियों एवं शिक्षकों के पे-वेरिफिकेशन की स्थिति पर भी रिपोर्ट तैयार करने को कहा गया है।

सभी विश्वविद्यालयों को निर्देश दिया गया है कि वे सत्र सुधार और वित्तीय प्रबंधन को लेकर तैयार किए गए एक्शन प्लान का विस्तृत प्रेजेंटेशन बनाकर लोकभवन में प्रस्तुत करें।

बीआरए बिहार विश्वविद्यालय समेत राज्य के कई विश्वविद्यालयों में शैक्षिक सत्र काफी पीछे चल रहा है। कहीं एक तो कहीं दो सेमेस्टर की पढ़ाई लंबित है। बीआरएबीयू में स्नातक का सत्र एक सेमेस्टर पीछे चल रहा है, जबकि पीजी का सत्र करीब एक वर्ष विलंबित है। विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार प्रो. समीर कुमार शर्मा ने बताया कि लोकभवन के निर्देशानुसार आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।

विश्वविद्यालय में लॉ और बीएड का सत्र भी देरी से संचालित हो रहा है। एलएलबी में अब तक दाखिले की प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी है। वहीं चार वर्षीय बीएड सत्र 2025-29 में अब तक दो सेमेस्टर की परीक्षाएं हो जानी चाहिए थीं, लेकिन एक भी परीक्षा आयोजित नहीं हो सकी है।

इसके अलावा होम्योपैथिक छात्रों की परीक्षा को लेकर भी विश्वविद्यालय प्रशासन कोई अंतिम निर्णय नहीं ले पाया है। एलएलएम सत्र 2024-26 के प्रथम सेमेस्टर की परीक्षा भी अब तक नहीं हुई है, जबकि यह सत्र इसी वर्ष समाप्त होना चाहिए था। एलएलएम सत्र 2025-27 में नामांकन प्रक्रिया भी लंबित है।

बीआरएबीयू में परीक्षा के साथ-साथ रिजल्ट जारी करने में भी देरी हो रही है। लॉ पार्ट-वन के छात्र अभी तक रिजल्ट का इंतजार कर रहे हैं। परीक्षा छह फरवरी को समाप्त हुई थी, लेकिन परिणाम घोषित नहीं हो सका है। छात्रों का कहना है कि दूसरे विश्वविद्यालयों के छात्र उनसे आगे निकल गए हैं।

सरकार और लोकभवन ने सभी विश्वविद्यालयों को परीक्षा समाप्त होने के 30 दिनों के भीतर रिजल्ट जारी करने का निर्देश दिया था। इसके बाद बीआरएबीयू ने परीक्षा कैलेंडर में 30 दिनों के भीतर रिजल्ट प्रकाशित करने का शिड्यूल भी बनाया, लेकिन यह व्यवस्था अब तक धरातल पर लागू नहीं हो सकी है। विश्वविद्यालय में कई परीक्षाएं और परिणाम अभी भी लंबित हैं।