Advertisement

महावाणी स्मरण काव्य गोष्ठी में झलका साहित्यिक रंग

-महावाणी स्मरण काव्य गोष्ठी में झलका साहित्यिक रंग

— कवियों ने सुनाई भावपूर्ण रचनाएं

मुजफ्फरपुर।संवाददाता।

प्रख्यात साहित्यकार जानकी बल्लभ शास्त्री जी की स्मृति में उनके आवास ‘निराला निकेतन’ में महावाणी स्मरण काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता हिन्दी एवं बज्जिका के वरिष्ठ कथाकार और कवि देवेन्द्र कुमार ने की, जबकि संचालन डा. हरि किशोर प्रसाद सिंह ने किया।

इस अवसर पर शहर के वरिष्ठ एवं नवोदित साहित्यकारों और कवियों ने अपनी उत्कृष्ट रचनाओं से वातावरण को भावमय बना दिया। कार्यक्रम की शुरुआत श्री राजीवेन्द्र किशोर ने शास्त्री जी की रचना “मैं गाऊं तेरा मंत्र समझ” से की।
वरिष्ठ गीतकार सत्येन्द्र कुमार सत्येन ने भोजपुरी गीत “अधपरतिया घरवा आवेला हमार पियवा निसखार” सुनाकर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।

देवेन्द्र कुमार ने अपनी कविता “नदी हूँ मैं, मैं मरूं जी सुखकर, सुखकर तू भी मरेगा” के माध्यम से जीवन-दर्शन प्रस्तुत किया।
प्रमोद नारायण मिश्र ने “आज कहने दो वरना कह न पायेंगे” से गहरी संवेदना जगाई।
डा. बीरेन्द्र कुमार मल्लिक की “भद्र काली कपालिनी” रचना ने कार्यक्रम को भक्तिमय बना दिया, जबकि शशि रंजन वर्मा ने “नारी व्यथा आऊं – आऊं हे सखी” के माध्यम से समाज की सच्चाई को उकेरा।

डा. हरि किशोर प्रसाद सिंह ने “सावन के बुन्नी बसई हऽ” सुनाकर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।
रामवृक्ष राम चकपुरी की “अंधकार मिटा, की है रौशनी” और उमेश राज की “जितने अपने थे सब पराये हो गये” जैसी रचनाओं ने सोचने पर मजबूर किया।
समापन में वरिष्ठ गीतकार अंजनी कुमार पाठक ने प्रेरक पंक्तियाँ “जबतक जीवन, नेकी है करना” प्रस्तुत कीं।

कार्यक्रम के अंत में समाजसेवी मोहन प्रसाद सिन्हा ने सभी कवियों और साहित्यप्रेमियों को धन्यवाद ज्ञापित किया।
कार्यक्रम में शहर का साहित्यिक वातावरण एक बार फिर जानकी बल्लभ शास्त्री की स्मृतियों से आलोकित हो उठा।