-मलबे में 10 दिन तक दबी रहीं 97 वर्षीय वृद्धा, रेस्क्यू टीम ने जिंदा बचाया
जनकपुरधाम/मिश्री लाल मधुकर। नेपाल में 26 अगस्त को भोटेकोशी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ के दौरान मलबे में दब गईं 97 वर्षीय वृद्धा गुनमाया बोहरा को करीब दस दिन बाद रेस्क्यू टीम ने जिंदा बाहर निकाल लिया। नेपाल आर्मी और नेपाल पुलिस के बचावकर्मियों ने करीब चार घंटे तक मलबा हटाने के बाद उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला। वृद्धा को इलाज के लिए बीर अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
गुनमाया बोहरा का जीवन संघर्षों से भरा रहा है। उनकी शादी महज आठ वर्ष की उम्र में हुई थी। उस समय बाल विवाह आम बात थी। शादी के कुछ वर्षों बाद ही उनके पति होम प्रसाद बोहरा की मौत हो गई। इसके बाद उनके माता-पिता और फिर भाई का भी निधन हो गया। महज 20 वर्ष की उम्र तक वह अपने लगभग सभी करीबी रक्त संबंधियों को खो चुकी थीं।
पति की मौत के बाद उन्होंने अपने ससुराल पक्ष को ही अपना परिवार मान लिया। पति के तीन भाइयों, उनकी पत्नियों और बच्चों के साथ उन्होंने जीवन बिताया। उन्होंने परिवार के 25 पोते-पोतियों के पालन-पोषण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आज वही पोते-पोतियां अस्पताल में बारी-बारी से उनकी देखभाल कर रहे हैं।

83 वर्ष की उम्र में गुनमाया देवीघाट स्थित एक वृद्धाश्रम में रहने चली गई थीं, ताकि उनके पोते-पोतियां और भतीजे उनसे आसानी से मिल सकें। लेकिन 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ ने वृद्धाश्रम को भी अपनी चपेट में ले लिया और वह मलबे में दब गईं।
दस दिनों तक मलबे में फंसे रहने के बाद भी उनका जिंदा मिलना किसी चमत्कार से कम नहीं माना जा रहा है। रेस्क्यू टीम ने घंटों की मशक्कत के बाद उन्हें बाहर निकाला।
डॉक्टरों के अनुसार, गुनमाया बोहरा हादसे के बाद गहरे मानसिक आघात (ट्रॉमा) से गुजर रही हैं। उन्हें अभी तक ठीक से समझ नहीं आ रहा कि उनके साथ क्या हुआ। अस्पताल में वह बार-बार एक ही सवाल पूछ रही हैं— “पानी मुझ पर क्यों गिरा?”
97 वर्ष की उम्र में दस दिनों तक मलबे के बीच जिंदगी की जंग लड़कर बाहर निकलना गुनमाया बोहरा के अदम्य साहस और जीवन की जिजीविषा की मिसाल बन गया है।













