-बिहार में जन्म-मृत्यु पंजीकरण व्यवस्था होगी मजबूत, डेटा आधारित सुशासन को मिलेगा बल
पटना, 15 जून। बिहार सरकार के योजना एवं विकास विभाग के अंतर्गत अर्थ एवं सांख्यिकी निदेशालय द्वारा संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) और संयुक्त राष्ट्र एशिया-प्रशांत आर्थिक एवं सामाजिक आयोग (यूएनईएससीएपी) के सहयोग से सोमवार को पटना में “बिहार में नागरिक पंजीकरण एवं महत्वपूर्ण सांख्यिकी (सीआरवीएस) प्रणाली में सुधार” विषयक कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस दौरान सीआरवीएस प्रणाली के सुदृढ़ीकरण के लिए तैयार मूल्यांकन, विश्लेषण एवं पुनर्रचना (एएआर) की प्रगति रिपोर्ट, नीति संक्षेपिका तथा जन-जागरूकता सामग्री का विमोचन किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बिहार सरकार के योजना एवं विकास मंत्री श्रीभगवान सिंह कुशवाहा ने कहा कि जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि नागरिकों तक सरकारी सेवाओं और अधिकारों की पहुंच सुनिश्चित करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने अधिकारियों को स्थानीय स्तर पर सूचना तंत्र मजबूत करने और पंजीकरण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने के निर्देश दिए।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए योजना एवं विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव डॉ. एन. विजयलक्ष्मी ने कहा कि सीआरवीएस प्रणाली का उद्देश्य समय पर विश्वसनीय आंकड़ों का संकलन तथा उनके आधार पर प्रभावी नीति-निर्माण करना है। उन्होंने प्रवासी एवं वंचित परिवारों के बीच जागरूकता बढ़ाने और पंजीकरण संबंधी व्यावहारिक समस्याओं को दूर करने पर बल दिया।
विकास आयुक्त, बिहार मिहिर कुमार सिंह ने कहा कि राज्य में लगभग 90 प्रतिशत जन्म स्वास्थ्य संस्थानों में हो रहे हैं, जिससे जन्म पंजीकरण को और सुदृढ़ करने का अवसर मिला है। उन्होंने संस्थागत एवं गैर-संस्थागत दोनों प्रकार के जन्मों के समयबद्ध पंजीकरण की आवश्यकता बताई।
कार्यशाला में प्रस्तुत एएआर रिपोर्ट में नागरिक पंजीकरण एवं महत्वपूर्ण सांख्यिकी प्रणाली का व्यापक आकलन करते हुए सेवा वितरण, संस्थागत क्षमता, जन-जागरूकता, समन्वय तथा पहुंच से जुड़ी चुनौतियों की पहचान की गई। रिपोर्ट में प्रणाली को अधिक नागरिक-केंद्रित, दक्ष और उत्तरदायी बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण अनुशंसाएं भी दी गई हैं।
कार्यक्रम में यूएनईएससीएपी की सांख्यिकी विशेषज्ञ डॉ. क्लोई मर्सिडीज हार्वे तथा यूनिसेफ बिहार के विशेषज्ञ डॉ. अभय कुमार ने रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्षों और सुझावों पर विस्तृत प्रस्तुति दी। राज्य और जिला स्तर के अधिकारियों तथा विभिन्न विभागों के प्रतिनिधियों ने भी कार्यशाला में भाग लेकर सुधारात्मक उपायों पर विचार-विमर्श किया।
कार्यक्रम के अंत में निदेशक एवं मुख्य रजिस्ट्रार (जन्म एवं मृत्यु), अर्थ एवं सांख्यिकी निदेशालय रंजीत कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल बिहार में जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण प्रणाली को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के साथ-साथ डेटा आधारित सुशासन और बेहतर सेवा वितरण को नई दिशा देगी।












