-बिहार पंचायत चुनाव 2026: गांव-गांव में सियासी सरगर्मी तेज, तय समय पर होंगे चुनाव
पटना। बिहार में पंचायत चुनाव 2026 को लेकर गांवों की राजनीति पूरी तरह गर्म हो चुकी है। मुखिया, सरपंच, पंचायत समिति सदस्य और वार्ड सदस्य पद के संभावित उम्मीदवार अभी से ही अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय हो गए हैं। गांव की चौपालों, बाजारों और चाय की दुकानों पर अब विकास से ज्यादा चर्चा चुनावी समीकरणों की होने लगी है। हर तरफ एक ही सवाल गूंज रहा है— “इस बार पंचायत की कुर्सी किसके हाथ जाएगी?”
इसी बीच पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने बड़ा बयान देते हुए साफ कर दिया है कि बिहार पंचायत चुनाव अपने निर्धारित समय पर ही कराए जाएंगे और इसमें किसी तरह की देरी नहीं होगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग दोनों स्तर पर चुनावी तैयारियां तेजी से चल रही हैं।
मंत्री ने बताया कि इस बार चुनाव प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी, निष्पक्ष और तकनीकी रूप से मजबूत बनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसके तहत राज्यभर में जनसंख्या प्रकाशन का कार्य जारी है, जिसे चुनावी प्रक्रिया का सबसे अहम चरण माना जाता है।
सरकार के अनुसार 9 जून को जनसंख्या का अंतिम प्रकाशन किया जाएगा। इसके बाद आम लोगों को आपत्ति दर्ज कराने का अवसर मिलेगा, ताकि किसी भी प्रकार की त्रुटि या विवाद का समय रहते समाधान किया जा सके। इसके बाद पंचायत चुनाव का सबसे महत्वपूर्ण चरण आरक्षण रोस्टर निर्धारण शुरू होगा।

आरक्षण रोस्टर तय होने के बाद यह स्पष्ट होगा कि कौन-सी पंचायत सीट सामान्य वर्ग के लिए होगी और कौन-सी अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग या महिला वर्ग के लिए आरक्षित की जाएगी। माना जा रहा है कि इस बार आरक्षण व्यवस्था में बड़े बदलाव संभव हैं, जिससे कई पंचायतों के राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं।
इसी संभावना ने गांवों में चुनावी हलचल और तेज कर दी है। संभावित उम्मीदवार अभी से ही जातीय और सामाजिक समीकरण साधने में जुट गए हैं। कहीं जनसंपर्क अभियान चल रहा है तो कहीं बैठकों और सामाजिक कार्यक्रमों के जरिए समर्थन जुटाने की कोशिश हो रही है।
पंचायती राज मंत्री ने यह भी बताया कि निर्वाचन आयोग मल्टीपोस्ट ईवीएम समेत तमाम तकनीकी और प्रशासनिक तैयारियों पर काम कर रहा है, ताकि मतदान प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित और निष्पक्ष तरीके से संपन्न हो सके। सरकार का लक्ष्य “फ्री एंड फेयर” चुनाव कराना है, जिसमें किसी भी स्तर पर गड़बड़ी की गुंजाइश न रहे।
हालांकि अभी पंचायत चुनाव की आधिकारिक तारीखों की घोषणा नहीं हुई है, लेकिन संभावना जताई जा रही है कि अक्टूबर 2026 के आसपास बिहार में पंचायत चुनाव कराए जा सकते हैं। राज्य की 8 हजार से अधिक पंचायतों में होने वाला यह चुनाव देश की सबसे बड़ी स्थानीय लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में से एक माना जाता है।
जैसे-जैसे जनसंख्या प्रकाशन, आरक्षण रोस्टर और चुनावी तारीखों से जुड़े फैसले सामने आएंगे, वैसे-वैसे बिहार की पंचायत राजनीति और अधिक तेज, दिलचस्प और निर्णायक होती जाएगी।












