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बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव तय! नीतीश कुमार राज्यसभा शपथ के बाद दे सकते हैं इस्तीफा, BJP चुनेगी नया मुख्यमंत्री

-बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव तय! नीतीश कुमार राज्यसभा शपथ के बाद दे सकते हैं इस्तीफा, BJP चुनेगी नया मुख्यमंत्री

पटना/नई दिल्ली: बिहार की राजनीति में बड़े सत्ता परिवर्तन की पटकथा लगभग तैयार मानी जा रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार शुक्रवार को नई दिल्ली में राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ग्रहण करेंगे। इसी के साथ बिहार में नए नेतृत्व को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। एक ओर नीतीश कुमार शपथ ग्रहण के लिए दिल्ली रवाना हो चुके हैं, तो दूसरी ओर भाजपा कोटे से दोनों उप मुख्यमंत्री समेत कई वरिष्ठ मंत्री भी राजधानी पहुंच गए हैं।
सूत्रों के मुताबिक शुक्रवार को दिल्ली में भाजपा की एक अहम बैठक होने जा रही है, जिसमें बिहार की सत्ता को लेकर बड़ा फैसला लिया जा सकता है। बताया जा रहा है कि भाजपा पहली बार बिहार में अपने मुख्यमंत्री चेहरे पर अंतिम निर्णय ले सकती है। इस बैठक में भाजपा कोर कमिटी, केंद्रीय नेतृत्व के वरिष्ठ नेता और बिहार भाजपा के शीर्ष पदाधिकारी शामिल होंगे।
चर्चा है कि बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह समेत भाजपा के कई दिग्गज नेता मौजूद रह सकते हैं। वहीं बिहार भाजपा की ओर से प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी, उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, विजय सिन्हा, श्रेयसी सिंह समेत कई अहम नेताओं की भागीदारी संभावित है।


इधर, जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने भी नई सरकार के गठन को लेकर बड़ा संकेत दिया है। दिल्ली रवाना होने से पहले मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि बिहार में नई सरकार के गठन की प्रक्रिया 13 अप्रैल के बाद शुरू हो जाएगी।
सूत्रों की मानें तो नीतीश कुमार राज्यसभा में शपथ लेने के बाद पटना लौटेंगे। इसके बाद 13 अप्रैल को NDA विधानमंडल दल की बैठक बुलाई जा सकती है, जिसमें वे अपने निर्णय की औपचारिक जानकारी देंगे। माना जा रहा है कि इसके बाद नीतीश कुमार राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप सकते हैं।
इसके बाद NDA विधायक दल की बैठक में नए नेता का चयन होगा और 15 अप्रैल को बिहार के नए मुख्यमंत्री अपनी कैबिनेट के साथ शपथ ले सकते हैं। खबर यह भी है कि इस शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी संभव है।
हालांकि इन सभी राजनीतिक घटनाक्रमों को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन दिल्ली और पटना के बीच तेज हुई सियासी गतिविधियों ने बिहार में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों को और मजबूत कर दिया है।