Advertisement

बांकीपुर उपचुनाव: भाजपा के बूथ मैनेजमेंट बनाम प्रशांत किशोर के जनसंपर्क अभियान की सीधी टक्कर

-बांकीपुर उपचुनाव: भाजपा के बूथ मैनेजमेंट बनाम प्रशांत किशोर के जनसंपर्क अभियान की सीधी टक्कर

पटना। बिहार की सबसे चर्चित विधानसभा सीटों में शामिल बांकीपुर इन दिनों महज एक उपचुनाव नहीं, बल्कि प्रदेश की राजनीति की दिशा तय करने वाला अहम मुकाबला बन गया है। एक ओर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अपने मजबूत संगठन और बूथ स्तर की रणनीति के दम पर जीत बरकरार रखने की तैयारी में है, तो दूसरी ओर जन सुराज के संयोजक प्रशांत किशोर आक्रामक जनसंपर्क अभियान के जरिए भाजपा के गढ़ में सेंध लगाने की कोशिश कर रहे हैं। इस चुनाव में संगठन बनाम जनसंपर्क, बूथ प्रबंधन बनाम राजनीतिक नैरेटिव और परंपरागत वोट बैंक बनाम नए मतदाताओं की पसंद की सीधी टक्कर देखने को मिल रही है।
भाजपा ने बांकीपुर में चार-स्तरीय चुनावी रणनीति लागू की है। पूरे विधानसभा क्षेत्र को 60 से अधिक शक्ति केंद्रों, 10 मंडलों और सभी बूथों में विभाजित कर कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारियां तय की गई हैं। पार्टी का मूल मंत्र “बूथ जीतो, चुनाव जीतो” है। इसी रणनीति के तहत 50 से अधिक विधायक और विधान परिषद सदस्य लगातार पॉकेट मीटिंग कर रहे हैं। मोहल्लों के सामाजिक और जातीय समीकरणों का विश्लेषण कर उसी समुदाय के प्रभावशाली नेताओं को प्रचार में लगाया गया है, ताकि मतदाताओं तक सीधा संवाद स्थापित किया जा सके।
वहीं, जन सुराज ने भी चुनावी मैदान में अपनी अलग रणनीति अपनाई है। पार्टी ने सभी 422 बूथों पर महिला कार्यकर्ताओं, बूथ प्रभारियों और युवा टीमों के साथ तीन-स्तरीय संगठन खड़ा किया है। प्रशांत किशोर लगातार पदयात्राएं कर रहे हैं और अब तक करीब 20 पदयात्राओं तथा दो दर्जन से अधिक मोहल्ला बैठकों के माध्यम से हजारों मतदाताओं से सीधा संवाद कर चुके हैं। पार्टी का दावा है कि माइक्रो मीटिंग के जरिए प्रतिदिन लगभग 5,000 मतदाताओं तक पहुंच बनाई जा रही है।


चुनावी अभियान के दौरान जन सुराज ने नीट पेपर लीक को प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बनाया है। प्रशांत किशोर लगातार आरोप लगा रहे हैं कि वर्षों से बिहार के छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हुआ है। उनका कहना है कि मेहनती युवाओं को रोजगार नहीं मिल रहा, जबकि पेपर लीक और भर्ती घोटालों ने व्यवस्था पर लोगों का भरोसा कमजोर किया है। वे अपनी सभाओं और बैठकों में इस मुद्दे को सरकार की जवाबदेही से जोड़ते हुए मतदाताओं के बीच उठा रहे हैं।
जन सुराज की रणनीति केवल मुद्दों तक सीमित नहीं है। पार्टी वार्ड पार्षद का चुनाव हार चुके स्थानीय नेताओं को संगठन से जोड़कर अपना जमीनी नेटवर्क मजबूत कर रही है। साथ ही करीब 20 स्टार प्रचारकों की टीम घर-घर जाकर मतदाताओं से संपर्क कर रही है। सोशल मीडिया पर भी पार्टी सक्रिय है, जहां 7–8 सदस्यों की डिजिटल टीम प्रतिदिन 10 से 11 वीडियो और पोस्ट के जरिए चुनावी माहौल बनाने में जुटी हुई है।
दूसरी ओर भाजपा अपने मजबूत संगठन, कार्यकर्ता नेटवर्क और पारंपरिक वोट बैंक पर भरोसा जता रही है। पार्टी का मानना है कि बांकीपुर उसका मजबूत गढ़ है और बूथ स्तर पर की गई तैयारियां उसे चुनाव में बढ़त दिलाएंगी।
बांकीपुर का यह उपचुनाव अब केवल एक सीट का मुकाबला नहीं रह गया है। राजनीतिक विश्लेषकों की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या भाजपा की संगठित चुनावी मशीनरी अपना दबदबा कायम रखेगी या प्रशांत किशोर का जनसंपर्क अभियान और नया राजनीतिक नैरेटिव शहरी मतदाताओं को प्रभावित करेगा। अब सबकी निगाहें मतदान और परिणाम पर टिकी हैं, जो बिहार की आगामी राजनीति के लिए महत्वपूर्ण संकेत दे सकते हैं।