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नई सरकार की पहली बड़ी चुनौती—विभागों के बंटवारे पर नीतीश–सम्राट की 50 मिनट की अहम बैठक पूरी

-नई सरकार की पहली बड़ी चुनौती—विभागों के बंटवारे पर नीतीश–सम्राट की 50 मिनट की अहम बैठक पूरी

पटना। दीपक कुमार तिवारी।

बिहार में एक बार फिर नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए सरकार का गठन होने के बाद अब सत्ता संचालन की असली परीक्षा विभागों के बंटवारे से शुरू हो गई है। गुरुवार को शपथ ग्रहण के बाद शुक्रवार सुबह मुख्यमंत्री आवास पर महत्वपूर्ण बैठक हुई, जिसमें उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी विभागों की प्रस्तावित सूची लेकर पहुंचे। बैठक लगभग 50 मिनट चली और सूत्रों के अनुसार इसी दौरान विभाग आवंटन को लेकर अंतिम सहमति बनी।

सीएम आवास पहुंचे उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी:

सुबह सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री के आवास पहुंचे और भाजपा कोटे से प्रस्तावित मंत्रियों की सूची नीतीश कुमार को सौंपी। बैठक में मंत्रालयों के वितरण, प्राथमिकताओं और जिम्मेदारियों पर गहन चर्चा हुई। माना जा रहा है कि यह मुलाकात नई सरकार की दिशा तय करने वाली साबित होगी।

गृह विभाग फिर नीतीश के पास रहने के संकेत:

पिछली सरकारों की तरह इस बार भी अनुमान है कि गृह विभाग नीतीश कुमार अपने पास रखेंगे। पुलिस, प्रशासन एवं कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों पर वे व्यक्तिगत रूप से सक्रिय भूमिका निभाते आए हैं, इसलिए यह अहम मंत्रालय उन्हीं के पास रहने की पूरी संभावना है।

सम्राट चौधरी को मिल सकता है वित्त विभाग:

सूत्र बताते हैं कि उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को पिछली बार की तरह इस बार भी वित्त विभाग की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। बजट, आर्थिक नीतियों और विकास योजनाओं को लेकर भाजपा इस मंत्रालय पर मजबूत पकड़ रखना चाहती है।

श्रेयसी सिंह को खेल विभाग की जिम्मेदारी:

इंटरनेशनल शूटर और पहली बार विधायक बनीं श्रेयसी सिंह को खेल विभाग दिया जा सकता है। खेल जगत में उनके अनुभव और युवाओं में लोकप्रियता को देखते हुए यह नियुक्ति भाजपा की बड़ी रणनीति मानी जा रही है।

जदयू मंत्रियों को मिल सकते हैं पुराने विभाग:

जदयू कोटे के मंत्रियों—विजेंद्र यादव, विजय चौधरी, श्रवण कुमार आदि को उनके पूर्व विभाग ही दिए जाने की संभावना है। अनुभवी टीम के साथ प्रशासनिक निरंतरता बनाए रखने की कोशिश दिख रही है।

आज पहली कैबिनेट बैठक:

विभागों के बंटवारे के बाद आज कैबिनेट की पहली बैठक होने की उम्मीद है, जिसमें 18वीं विधानसभा के पहले सत्र की तारीख तय की जा सकती है। इसके अलावा किसान योजनाओं, उद्योग नीति, नौकरी से जुड़े निर्णय और कानून व्यवस्था को लेकर महत्वपूर्ण फैसलों की भी घोषणा हो सकती है।

मंत्रिमंडल की संरचना—भाजपा का मजबूत दबदबा:

नई कैबिनेट में कुल 26 मंत्रियों को शामिल किया गया है:

भाजपा — 14

जदयू — 8

लोजपा (रामविलास) — 2

हम — 1, कुशवाहा दल — 1

9 नए चेहरे शामिल किए गए हैं, जिनमें श्रेयसी सिंह और रामकृपाल यादव प्रमुख हैं। जदयू ने जमा खान को फिर से मंत्री बनाकर अल्पसंख्यक प्रतिनिधित्व बरकरार रखा है।

चिराग पासवान की पार्टी को 2 मंत्री:

लोजपा (आरवी) कोटे से दो विधायकों को मंत्रिपद मिला है। महुआ से विजय हासिल कर तेजप्रताप यादव को हराने वाले संजय सिंह उनमें प्रमुख हैं। यह नियुक्ति चिराग पासवान की बढ़ती राजनीतिक ताकत का संकेत मानी जा रही है।

उपेंद्र कुशवाहा के पुत्र बिना चुनाव मंत्री:

सबसे चर्चित नाम रहा दीपक प्रकाश (उपेंद्र कुशवाहा के पुत्र) का, जिन्होंने बिना चुनाव लड़े मंत्री पद की शपथ ली। संविधान के अनुसार उन्हें 6 महीने के भीतर एमएलसी बनाया जाएगा।

आगे की राह:

नीतीश कुमार और सम्राट चौधरी की इस 50 मिनट की मुलाकात ने नई सरकार के कामकाज की दिशा को लगभग स्पष्ट कर दिया है। अब सबकी निगाहें कैबिनेट बैठक और आगामी फैसलों पर टिकी हैं, जो बिहार की राजनीति और विकास की राह को तय करेंगे।