-गया, नवादा और जहानाबाद के किसानों की जीवनरेखा बनी ढाढ़र सिंचाई परियोजना
पटना।दीपक कुमार तिवारी।
बिहार के गया जिले में स्थित ढाढ़र सिंचाई परियोजना आज गया, नवादा और जहानाबाद के लाखों किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है। वर्ष 2020 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा उद्घाटित इस महत्वाकांक्षी परियोजना ने वर्षों से सिंचाई संकट झेल रहे किसानों को बड़ी राहत दी है। अब किसानों को खेतों की सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध हो रहा है, जिससे कृषि उत्पादन में भी वृद्धि हुई है।
गया जिले के फतेहपुर प्रखंड के सोहजना दोनैया गांव के समीप ढाढ़र नदी पर 138 मीटर लंबे बैराज का निर्माण किया गया है। तिलैया-ढाढ़र अपसरण योजना के तहत तिलैया जलाशय से 1.40 लाख एकड़ फीट पानी नहरों के माध्यम से बैराज तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई थी। इस परियोजना से गया और नवादा जिले के करीब 31,700 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था।
करीब 300 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित इस परियोजना का पानी किसानों के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है। मानसून के दौरान बैराज में संग्रहित जल को विभिन्न नहरों और शाखा नहरों के माध्यम से खेतों तक पहुंचाया जाता है। वर्तमान में लगभग 6,900 हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की सिंचाई की जा रही है, जबकि शेष क्षेत्र में सिंचाई सुविधा बहाल करने के लिए झारखंड के तिलैया जलाशय से अतिरिक्त जल की आवश्यकता बनी हुई है।
इस परियोजना का इतिहास भी काफी रोचक रहा है। इसकी परिकल्पना वर्ष 1964 में तत्कालीन जहानाबाद सांसद सत्यभामा देवी की पहल पर की गई थी। गया क्षेत्र में लगातार पड़ रहे सूखे को देखते हुए उन्होंने केंद्र सरकार के समक्ष इस योजना का प्रस्ताव रखा था। वर्ष 1974 में परियोजना को अंतिम रूप दिया गया और 20 अक्टूबर 1984 को तत्कालीन मुख्यमंत्री चंद्रशेखर सिंह ने इसका शिलान्यास किया।

प्रारंभिक योजना के अनुसार इसे वर्ष 1990 तक पूरा किया जाना था, लेकिन विभिन्न प्रशासनिक और वित्तीय कारणों से परियोजना की गति धीमी रही। वर्ष 2000 में बिहार-झारखंड विभाजन के बाद तिलैया डैम झारखंड में चला गया और पानी आपूर्ति को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया, जिससे परियोजना लंबे समय तक अधर में लटकी रही।
परियोजना को पुनर्जीवित करने के लिए समाजसेवियों और किसानों ने लगातार आंदोलन चलाया। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जिसके बाद केंद्र सरकार ने इसे नौवीं पंचवर्षीय योजना में शामिल करते हुए आर्थिक सहायता प्रदान की। लंबे संघर्ष के बाद परियोजना को नया जीवन मिला और आज इसका लाभ लाखों किसानों तक पहुंच रहा है।
विभागीय सूत्रों के अनुसार खरीफ मौसम में सोहजना दोनैया बैराज से लगभग 739 क्यूसेक पानी छोड़ा जाता है, जो नहरों के माध्यम से खेतों तक पहुंचता है। इससे धान सहित अन्य खरीफ फसलों की खेती करने वाले किसानों को विशेष लाभ मिलता है। इसके अलावा परियोजना से भविष्य में 60 मेगावाट बिजली उत्पादन का भी लक्ष्य रखा गया है।
ढाढ़र सिंचाई परियोजना न केवल सिंचाई व्यवस्था को मजबूत कर रही है, बल्कि यह बिहार के कृषि विकास और किसानों की आर्थिक समृद्धि की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। वर्षों के संघर्ष और इंतजार के बाद यह परियोजना आज तीन जिलों के किसानों की जीवनरेखा बन चुकी है।












