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सियासत: बिहार में बड़े सियासी भूचाल के आसार?

-बिहार में बड़े सियासी भूचाल के आसार?

पटना। सम्वाददाता।

बिहार की राजनीति में लोकसभा चुनाव से पहले बड़े भूचाल के आसार नजर आ रहे हैं। बिहार में सबसे ज्यादा दुविधा में अगर कोई राजनीतिक दल है तो वह है जनता दल यूनाइटेड जिसके नेता है बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार है इस पार्टी में जितने बड़े नेता हैं उतने गुट हैं और यह गुटबाजी अब खुलकर सामने आने लगी है। आरसीपी सिंह उपेंद्र कुशवाहा रणवीर नंदन जैसे बड़े नेता पार्टी से किनारा करके या तो अपना खुद का दल बना चुके हैं या बीजेपी जैसे पार्टियों में शामिल हो चुके हैं अशोक चौधरी जैसे दलित नेता जो नीतीश कुमार के काफी करीबी है उनके और जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह के बीच छत्तीस का आंकड़ा है और जिसे जल्द ही बड़े राजनीतिक विस्फोट के रूप में देखा जा सकता है ललन सिंह और अशोक चौधरी में किसका पलड़ा भारी है यह बताने की जरूरत नहीं है भले ललन सिंह जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष हो पर पार्टी में उनसे ज्यादा कार्यकर्ताओं और नेताओं पर पकड़ अशोक चौधरी की है। अंग प्रदेश से लेकर शेखपुरा तक में अशोक चौधरी ने बढ़िया फील्डिंग सजा रखी है मुंगेर में भी ललन सिंह को एमएलसी चुनाव में अशोक चौधरी अपनी राजनीतिक सूझबूझ का चमत्कार दिखा चुके हैं जब ललन सिंह का कैंडिडेट अशोक चौधरी गुटके खामोशी के कारण बिहार विधान परिषद के चुनाव में हार गया और जीतने वाले भूमिहार समुदाय के राजद के उम्मीदवार अशोक चौधरी के निकट संबंधी रहे।

सूत्रों की माने तो 2024 में नीतीश कुमार को राजद से हुई करार के अनुसार मुख्यमंत्री पद छोड़ना है। प्लान के अनुसार नीतीश कुमार देश स्तर पर लोकसभा चुनाव के लिए विपक्षी दलों को एकजुट करने में लगे हुए हैं। एकजुटता भी नजर आ रही है पर नीतीश के नेतृत्व पर राजद को छोड़कर किसी दल को कोई रुचि नहीं है। अगले वर्ष यानी 2024 में लोकसभा का चुनाव होना है नीतीश कुमार एक तीर से दो निशाना करना चाह रहे हैं वह चाहते हैं कि 2024 में ही बिहार विधानसभा का चुनाव भी लोकसभा के साथ करवा लिया जाए यह चुनाव नीतीश कुमार के नहीं तेजस्वी के नेतृत्व में लड़ा जाएगा बिहार में सामाजिक परिस्थितियों अलग है और अंतिम समय में वोटरों का मन मिजाज बदलने अलग प्रत्याशियों का चयन भी सबसे कठिन कार्य है जिसका भी टिकट कटेगा वह दल और गठबंधन के लिए सबसे बड़ा खतरा होगा ऐसे में बिहार के शर्मा तमाम सर्वेक्षण फेल ही नजर आएंगे। भाजपा सम्राट चौधरी के नेतृत्व में अति पिछड़ा पिछड़ा दलित स्वर्ण वोटरों को एकजुट करने में लगी है इसी अनुसार संगठन और पार्टी में सभी जातियों को प्रतिनिधित्व दिया गया है राजद अपने मुस्लिम यादव समीकरण को छोड़कर किसी दूसरे समीकरण पर विश्वास करने को तैयार नहीं है ऐसी स्थिति में सबसे ज्यादा अगर कोई पार्टी घाटे में नजर आ रही है तो वह है जनता दल यूनाइटेड जिसके पास अपना कोई कोर वोटर नहीं है लवकुश समीकरण भी बिहार में दरक चुका है नीतीश कुमार अपने राजनीति के एक ऐसे दौर में है जहां उन्हें अपने कद और पद की चिंता सबसे ज्यादा सता रही है ऐसे में पार्टी के अंदर बड़ी टूट से भी इनकार नहीं किया जा सकता है कई सारे नेता राजद के संपर्क में है तो कई सारे नेता पार्टी के स्वतंत्र अस्तित्व को कायम रखने के लिए भी लगे हुए। जनता दल यूनाइटेड में नीतीश कुमार के बाद दूसरा सर्वमान्य नेता कौन होगा इसको लेकर भी अंदर खाने में चर्चा तेज है ऐसे में ललन सिंह और अशोक चौधरी ही दो बड़े चेहरे हैं जिन पर दाव लगाया जा सकता है। पलड़ा अशोक चौधरी का ही भारी है। ललन सिंह मुंगेर से तो अशोक चौधरी खुद जमुई से चुनाव लड़ने की तैयारी में है और टिकट भी कंफर्म है बांका में तीन चेहरों के बीच में लड़ाई फस गई है गिरधारी यादव सांसद हैं राजद वाले जयप्रकाश नारायण यादव चुनाव लड़ने की तैयारी में है और नीतीश कुमार नए समीकरण के तहत निर्दलीय सुमित कुमार सिंह को यहां से चुनाव लड़वाना चाहते हैं। बांका जमुई और मुंगेर का समीकरण काफी कठिन है अगर अशोक चौधरी को जमुई से टिकट मिलता है तभी मुंगेर में ललन सिंह का विनिंग कमीशन तैयार होगा जमुई से विनिंग कांबिनेशन के लिए सुमित सिंह को बांका लोकसभा देना होगा तब जाकर जातीय समीकरणों को संतुष्ट किया जा सकेगा। जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा को लेकर भी बड़ी चर्चा है। नीतीश कुमार अपने दल के अंदर चल रहे उठा पटक को भली-भांति समझ रहे हैं जो करीबी नेता दल को तोड़ने के बड़े साजिश में लगा हुआ है इसकी भनक भी नीतीश को लग गई है।राजनीति में संभावनाएं कभी समाप्त नहीं होती।

© अनूप नारायण सिंह