-सकरा में श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञानयज्ञ का शुभारंभ, निकली भव्य कलश यात्रा
मुजफ्फरपुर। सकरा प्रखंड के फिरोजपुर गांव में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञानयज्ञ का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चारण और धार्मिक अनुष्ठानों के साथ हुआ। कार्यक्रम के प्रथम दिन हरिहर क्षेत्र गजेन्द्र मोक्ष पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी लक्ष्मणाचार्य जी महाराज के सान्निध्य में भव्य कलश यात्रा निकाली गई।
कलश यात्रा विभिन्न गांवों का भ्रमण करते हुए भरतीपुर स्थित रामजानकी ठाकुरबाड़ी पहुंची, जहां पहलेजा घाट से लाए गए गंगाजल का वैदिक रीति-रिवाज से पूजन कराया गया। वैदिक विद्वानों ने जलमातृका, स्थलमातृका एवं अन्य धार्मिक अनुष्ठानों का संपादन कराया। इसके बाद पीत वस्त्र धारण किए हुए महिलाओं एवं श्रद्धालुओं ने कलश में पवित्र जल भरकर “गोविंद जय-जय, गोपाल जय-जय” के संकीर्तन के साथ यज्ञस्थल पर कलश स्थापित किए।
अनुष्ठान के उपरांत पंचांग पूजन, देवी-देवताओं का आवाहन तथा श्रीमद्भागवत का पारायण हुआ। धर्मसभा को संबोधित करते हुए स्वामी लक्ष्मणाचार्य जी ने श्रीमद्भागवत महात्म्य का वर्णन करते हुए राजा परीक्षित के जन्म एवं उनके जीवन प्रसंग की कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि राजा परीक्षित धर्म स्थापना और जनकल्याण के लिए प्रसिद्ध हुए, लेकिन ऋषिपुत्र श्रृंगी के श्राप के कारण सातवें दिन सर्पदंश से उनकी मृत्यु हुई।

वहीं ज्ञानयज्ञ के द्वितीय दिवस स्वामी लक्ष्मणाचार्य जी ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि संसार के किसी भी भौतिक बल से स्थायी मुक्ति संभव नहीं है। जीव को मोक्ष तभी प्राप्त होता है जब वह पूर्ण समर्पण के साथ भगवान की शरण ग्रहण करता है। उन्होंने कर्दम ऋषि और देवहूति के विवाह प्रसंग का वर्णन करते हुए विवाह संस्कार की महत्ता पर प्रकाश डाला।
स्वामी जी ने कहा कि भारतीय संस्कृति में विवाह केवल सामाजिक बंधन नहीं, बल्कि धर्म और आध्यात्मिक उन्नति का माध्यम है। पति-पत्नी का संबंध परस्पर सहयोग और धर्म पालन का आधार है। कथा के दौरान यज्ञ के यजमान वरुण कुमार सिंह एवं उनकी पत्नी रानी देवी ने प्रतीकात्मक रूप से विवाह संस्कार की रस्मों का निर्वहन किया। इस अवसर पर जयमाल कार्यक्रम भी आयोजित किया गया तथा महिलाओं ने मांगलिक गीत प्रस्तुत किए।
कार्यक्रम के अंत में श्रीमद्भागवत जी की आरती, प्रसाद वितरण एवं भंडारे का आयोजन किया गया। इस अवसर पर वरुण कुमार सिंह, अमरेश सिंह, श्रीराम सिंह, गोपाल शास्त्री, शिवनारायण शास्त्री, वीरेंद्र झा, विवेकानंद झा, श्रीलाल पाठक सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।










