-मखदूम शाह बाबा की मजार पर अकीदत के साथ मनाई गई ग्यारहवीं शरीफ
राजापाकर/संजय श्रीवास्तव। राजापाकर प्रखंड क्षेत्र के भुवनेश्वर चौक स्थित मखदूम शाह बाबा की मजार पर ग्यारहवीं शरीफ का त्योहार अकीदत और श्रद्धा के साथ मनाया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में अकीदतमंद मजार पर पहुंचे और चादरपोशी कर अमन, खुशहाली, आपसी भाईचारे और क्षेत्र की तरक्की के लिए दुआ मांगी।
ग्यारहवीं शरीफ को लेकर मजार परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया गया था। सुबह से ही अकीदतमंदों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। लोगों ने मजार पर फूल और चादर पेश कर फातिहा पढ़ी। इस दौरान अपने परिवार की खुशहाली के साथ समाज में शांति और आपसी सौहार्द की दुआ की गई।
कार्यक्रम के दौरान उलेमाओं और मौलानाओं ने ग्यारहवीं शरीफ की धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि ग्यारहवीं शरीफ आम तौर पर सूफी संत हजरत शेख अब्दुल कादिर जिलानी, जिन्हें गौस-ए-आजम और बड़े पीर के नाम से भी याद किया जाता है, की याद में मनाई जाती है। इस अवसर पर फातिहा, दुआ, कुरआन-ख्वानी और लंगर-तबर्रुक जैसे धार्मिक आयोजन किए जाते हैं।

उलेमाओं ने कहा कि ऐसे आयोजन लोगों को नेक रास्ते पर चलने, जरूरतमंदों की मदद करने और आपसी भाईचारा कायम रखने का संदेश देते हैं। मजार पर आने वाले अकीदतमंदों के बीच तबर्रुक का वितरण भी किया गया। विभिन्न समुदायों के लोगों ने कार्यक्रम में सहभागिता कर सामाजिक एकता और आपसी सद्भाव का संदेश दिया।
आयोजन को सफल बनाने में दरगाह कमेटी के सदस्य मोहम्मद मुस्तफा आलम, मोहम्मद जलालुद्दीन, मोहम्मद तैयब, मोहम्मद कासिम, मोहम्मद सत्तार अंसारी, मोहम्मद उस्मान, मोहम्मद रमजान, मोहम्मद शकूर, मोहम्मद जमील, मोहम्मद जब्बार अंसारी, मोहम्मद इस्लाम, मोहम्मद इस्तखार, मोहम्मद मनान, मोहम्मद अब्दुल्ला सहित अन्य लोगों ने सक्रिय भूमिका निभाई।












