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भाकपा (माले) का 12वां बिहार राज्य सम्मेलन संपन्न, कुणाल फिर बने राज्य सचिव

-भाकपा (माले) का 12वां बिहार राज्य सम्मेलन संपन्न, कुणाल फिर बने राज्य सचिव

दरभंगा/पटना, 18 मई 2026।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन यानी भाकपा (माले) का 12वां बिहार राज्य सम्मेलन तीन दिनों तक चली राजनीतिक बहस, संगठनात्मक समीक्षा और भविष्य की रणनीति तय करने के बाद सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। सम्मेलन में पार्टी के कामकाज की रिपोर्ट पर व्यापक चर्चा की गई तथा राज्य की राजनीतिक परिस्थितियों, जनआंदोलनों और संगठन विस्तार को लेकर कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए।

सम्मेलन को संबोधित करते हुए पार्टी के महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि देश और बिहार दोनों कठिन दौर से गुजर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और उसके सहयोगियों द्वारा लोकतांत्रिक अधिकारों, संविधान और गरीबों के हितों पर लगातार हमले किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन बुलडोज़र राज, दमनकारी नीतियों और लोकतंत्र विरोधी राजनीति के खिलाफ संघर्ष को और मजबूत करने का संकल्प है।

उन्होंने कार्यकर्ताओं से गांव-गांव और मोहल्लों तक पहुंचकर गरीबों, मजदूरों, किसानों, युवाओं, महिलाओं और छात्रों के मुद्दों पर संघर्ष तेज करने का आह्वान किया। साथ ही भाजपा की सांप्रदायिक राजनीति के खिलाफ एकजुट होकर संगठन मजबूत करने की अपील की।

सम्मेलन के पर्यवेक्षक एवं माले पोलितब्यूरो सदस्य वी शंकर ने कहा कि बिहार हमेशा देश की राजनीति को दिशा देने वाला राज्य रहा है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष शक्तियों को व्यापक एकता बनाकर आगे बढ़ना होगा।

सम्मेलन में ध्वनिमत से पार्टी की कार्य रिपोर्ट पारित की गई। इसके बाद 107 सदस्यीय नई राज्य कमिटी का गठन किया गया, जिसमें सर्वसम्मति से कॉमरेड कुणाल को दोबारा राज्य सचिव चुना गया।

नई राज्य कमिटी में महिलाओं, युवाओं और आंदोलनकारी कार्यकर्ताओं को विशेष प्रतिनिधित्व दिया गया है। पार्टी ने 27 नए चेहरों को राज्य कमिटी में शामिल किया है, जबकि 13 साथियों को आमंत्रित सदस्य बनाया गया है। पार्टी नेतृत्व ने इसे नई पीढ़ी को नेतृत्व में आगे लाने की दिशा में अहम कदम बताया।

सम्मेलन में आगामी संघर्षों और अभियानों को लेकर 10 सूत्री कार्यभार भी पारित किए गए। पार्टी ने 20 मई को ग्रामीण मजदूरों की हड़ताल को सफल बनाने और उसी दिन से बिहार के 10 लाख गरीब परिवारों के बीच जनसंपर्क अभियान चलाने का निर्णय लिया।

इसके अलावा महिला आरक्षण कानून को तत्काल लागू करने, जाति आधारित जनगणना कराने, समता आंदोलन को मजबूत करने तथा बुलडोज़र कार्रवाई के खिलाफ जनआंदोलन चलाने के प्रस्ताव भी पारित किए गए। सम्मेलन में बिहार के शिक्षा मंत्री के हालिया बयान की आलोचना करते हुए उसे शिक्षा और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया गया।

सम्मेलन का समापन इंकलाबी नारों तथा लोकतंत्र, संविधान और जनाधिकारों की रक्षा के संकल्प के साथ हुआ।