-पद्मश्री से मरणोपरांत सम्मानित होंगे कृषि वैज्ञानिक डॉ. गोपाल जी त्रिवेदी
मुजफ्फरपुर/बंदरा, दीपक कुमार तिवारी।
पूसा स्थित डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति एवं प्रख्यात कृषि वैज्ञानिक डॉ. गोपाल जी त्रिवेदी को मरणोपरांत पद्मश्री सम्मान प्रदान किया जाएगा। राष्ट्रपति द्वारा 25 मई को आयोजित समारोह में उनके नाम घोषित पद्मश्री पुरस्कार को उनके परिवार के सदस्य ग्रहण करेंगे।
सोमवार की रात डॉ. त्रिवेदी के इकलौते पुत्र डॉ. रमन त्रिवेदी ने बताया कि उन्हें इस संबंध में आधिकारिक सूचना पत्र प्राप्त हो चुका है। उन्होंने कहा कि वे परिवार के अन्य सदस्यों के साथ नई दिल्ली जाकर यह सम्मान ग्रहण करेंगे। इस दौरान डॉ. रमन त्रिवेदी भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि यदि उनके पिताजी स्वयं जीवित रहते और यह सम्मान ग्रहण करते, तो यह पल पूरे परिवार एवं क्षेत्र के लिए और भी गौरवपूर्ण होता।
उन्होंने कहा कि एक ओर पद्मश्री मिलने की खुशी है, वहीं दूसरी ओर पिता के निधन का गहरा दुख भी है। यदि यह सम्मान उन्हें जीवित अवस्था में मिलता, तो परिवार और समाज के लिए यह और अधिक गौरवान्वित करने वाला क्षण होता।

ज्ञात हो कि बिहार में टिकाऊ कृषि पद्धतियों को नई दिशा देने वाले कृषि वैज्ञानिक डॉ. गोपाल जी त्रिवेदी का 12 मई 2026 को 96 वर्ष की आयु में पटना के मेदांता अस्पताल में निधन हो गया था। सांस संबंधी समस्या के कारण उनका इलाज चल रहा था।
डॉ. त्रिवेदी को वर्ष 2026 में विज्ञान एवं इंजीनियरिंग (कृषि) क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए पद्मश्री सम्मान देने की घोषणा की गई थी। लीची उत्पादन में कैनोपी प्रबंधन तकनीक, मखाना एवं सिंघाड़ा की खेती को बढ़ावा देने तथा जलजमाव वाले क्षेत्रों में खेती की नई तकनीक विकसित करने में उनका योगदान अतुलनीय माना जाता है।
वे वर्ष 1988 से 1991 तक पूसा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति रहे। किसानों को आधुनिक खेती की जानकारी देने के लिए उन्होंने ‘बाबा’ संस्था के माध्यम से लगातार कार्य किया। कृषि क्षेत्र में उनके योगदान के कारण उन्हें बिहार में “मक्का क्रांति के जनक” के रूप में भी जाना जाता था।












