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पंचायत चुनाव की सुगबुगाहट पर होने लगी चर्चा, कई वर्तमान जनप्रतिनिधियों की कुर्सी पर संकट के संकेत!

-पंचायत चुनाव की सुगबुगाहट पर होने लगी चर्चा, कई वर्तमान जनप्रतिनिधियों की कुर्सी पर संकट के संकेत!

मुजफ्फरपुर/बन्दरा। दीपक कुमार तिवारी।

बन्दरा प्रखंड क्षेत्र में पंचायत चुनाव की आहट की खबरों के साथ ही ग्रामीण राजनीतिक माहौल समीक्षात्मक होने लगा है। गांव के चौपालों से लेकर चाय दुकानों तक पंचायत प्रतिनिधियों के कार्यकाल और उनकी कार्यशैली को लेकर चर्चा का दौर शुरू हो गया है। क्षेत्र में चल रही चर्चाओं और समीक्षाओं के आधार पर इस बार पंचायत चुनाव में कई वर्तमान जनप्रतिनिधियों की राह मुश्किल दिख रही है।

ग्रामीण जानकारों का मानना है कि कहीं आरक्षण बदलाव की संभावनाएं असर डाल रही हैं तो कहीं जनप्रतिनिधियों के कार्य व्यवहार, उपेक्षा की भावना और लोगों से दूरी उनके खिलाफ माहौल बना रही है। कुछ प्रतिनिधियों की छवि सोशल मीडिया पर बदलती गतिविधियों और सार्वजनिक व्यवहार के कारण भी प्रभावित होने की चर्चा है।

स्थानीय लोगों के बीच यह धारणा बन रही है कि इस बार पंचायत चुनाव में मतदाता नए, गंभीर, ईमानदार और जिम्मेदार छवि वाले उम्मीदवारों को मौका देने के पक्ष में दिलचस्पी जता रहे हैं। प्रायः मुखिया, पंचायत समिति सदस्य, जिला परिषद सदस्य, वार्ड सदस्य, सरपंच और पंच जैसे पदों पर बदलाव की संभावना को लेकर चर्चा तेज है।

बताया जा रहा है कि निवर्तमान प्रतिनिधियों के बीच आपसी समन्वय,लोगों की उपेक्षा एवं सम्मान की कमी भी लोगों की नाराजगी का कारण बन रही है।जरूरत के कामों का नहीं होना और कामों की गुणवत्तापूर्ण नहीं होना भी कारणों में शामिल है। लोगों के आपसी विवादों एवं विस एवं लोस चुनावों में पंचायत प्रतिनिधियों की सक्रियता एवं उनका वर्ताव भी उनकी क्षवि ख़राब की है। ग्रामीण क्षेत्रों में मतदाता अब विकास कार्यों, पारदर्शिता और जनसरोकार के मुद्दों को अधिक महत्व देते नजर आ रहे हैं।

प्रखंड सूत्रों के अनुसार पंचायत चुनाव तय समय पर होने के संकेत मिल रहे हैं। आरक्षण से संबंधित प्रक्रिया जून माह तक स्पष्ट होने की संभावना है। फिलहाल आवश्यक प्रशासनिक रिपोर्ट और प्रक्रियाएं जारी हैं। गौरतलब है कि हाल के दिनों में विभागीय मंत्री की ओर से भी बिहार में तय समय पर पंचायत चुनाव कराने के संकेत दिए गए थे।

अब देखना दिलचस्प होगा कि पंचायत चुनाव की घोषणा के बाद क्षेत्र की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ती है और अबकी जनता कैसे और किन चेहरों पर भरोसा जता पाएगी।