-नेपाल के वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. राजेंद्र विमल का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार, साहित्य जगत में शोक
जनकपुरधाम/मिश्री लाल मधुकर। नेपाल के वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. राजेंद्र विमल का मंगलवार तड़के जनकपुरधाम के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। उनके निधन के बाद पूरे साहित्यिक और सामाजिक जगत में शोक की लहर है। उनका अंतिम संस्कार जनकपुरधाम के गंगासागर तट स्थित स्वर्णद्वारी में पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया गया।
अंत्येष्टि के दौरान संस्कृति, पर्यटन मंत्री खड्ग राज पौडेल, मधेश प्रदेश के गवर्नर, दिवंगत डॉ. विमल के अनुज डॉ. सुरेंद्र लाभ, मधेश प्रदेश के सभापति रामाशीष यादव, स्थानीय सांसद मनीष कुमार झा, मेयर मनोज कुमार साह सहित बड़ी संख्या में साहित्यकार, जनप्रतिनिधि और शहर के गणमान्य लोग मौजूद रहे। डॉ. राजेंद्र विमल के पार्थिव शरीर पर नेपाली झंडा ओढ़ाया गया और पुलिस ने शोक धुन बजाकर राजकीय सम्मान के साथ सलामी दी।
दिवंगत साहित्यकार के पैतृक आवास पर सुबह से ही श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लगा रहा। मधेश प्रदेश के मुख्यमंत्री सहित कई प्रमुख लोग उनके आवास पर पहुंचे और श्रद्धांजलि अर्पित की। दोपहर करीब ढाई बजे गाजे-बाजे के साथ डॉ. राजेंद्र विमल का पार्थिव शरीर अंतिम यात्रा के लिए उनके आवास से निकाला गया। जनक चौक पर कुछ देर के लिए पार्थिव शरीर को आम नागरिकों के अंतिम दर्शन के लिए रखा गया, जहां बड़ी संख्या में लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

इसके बाद अंतिम यात्रा गंगासागर तट स्थित स्वर्णद्वारी पहुंची, जहां राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। उनके बड़े पुत्र डॉ. आभाष लाभ ने मुखाग्नि दी।
डॉ. राजेंद्र विमल ने जनकपुरधाम स्थित रामस्वरूप रामसागर बहुमुखी महाविद्यालय में 30 वर्षों से अधिक समय तक नेपाली विषय के वरिष्ठ प्राध्यापक के रूप में अपनी सेवाएं दीं। हालांकि साहित्य जगत में वे विशेष रूप से मैथिली साहित्यकार के रूप में जाने जाते थे। मैथिली के साथ-साथ उन्हें कई अन्य भाषाओं पर भी अच्छी पकड़ थी।
साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को देखते हुए नेपाल सरकार सहित विभिन्न संस्थाओं की ओर से उन्हें कई बार सम्मानित किया जा चुका था। उनके निधन को साहित्य और शिक्षा जगत के लिए बड़ी क्षति माना जा रहा है।
डॉ. राजेंद्र विमल के निधन पर जनकपुरधाम उपमहानगरपालिका की ओर से एक दिन के अवकाश की घोषणा भी की गई। उनके निधन से जनकपुरधाम सहित नेपाल के साहित्यिक एवं बौद्धिक क्षेत्र में गहरा शोक व्याप्त है।












