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निराला निकेतन में महावाणी स्मरण सह काव्य गोष्ठी आयोजित, कवियों ने कविता-पाठ से बांधा समां

-निराला निकेतन में महावाणी स्मरण सह काव्य गोष्ठी आयोजित, कवियों ने कविता-पाठ से बांधा समां

मुजफ्फरपुर।दीपक तिवारी। प्रत्येक माह की भांति रविवार को निराला निकेतन, मुजफ्फरपुर स्थित महाकवि आचार्य जानकी वल्लभ शास्त्री की प्रतिमा स्थल पर महावाणी स्मरण सह काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि डॉ. हरि किशोर प्रसाद सिंह ने की, जबकि मंच संचालन दीनबंधु आजाद ने किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ अंजनी कुमार पाठक ने आचार्य जानकी वल्लभ शास्त्री के गीतों के साथ किया। उन्होंने “जय भोलेनाथ, जय शिवशंकर…” की प्रस्तुति देकर पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
काव्य गोष्ठी में शहर के अनेक वरिष्ठ कवियों, साहित्यकारों और गीतकारों ने अपनी रचनाओं का पाठ किया। जगदीश शर्मा ने हास्य-व्यंग्य से श्रोताओं को गुदगुदाया, वहीं डॉ. हरि किशोर प्रसाद सिंह ने “बेटी है घर का सम्मान” कविता के माध्यम से बेटियों के महत्व को रेखांकित कियाl


उमेश राज ने अपनी व्यंग्यात्मक रचना “गली के सारे कुत्ते दरबारी हो गए…” सुनाकर समकालीन सामाजिक व्यवस्था पर कटाक्ष किया। दीनबंधु आजाद ने “ईश्वर का दिया कभी अल्प नहीं होता, जो टूट जाए वो संकल्प नहीं होता” सुनाकर सकारात्मक सोच और आस्था का संदेश दिया।
वरिष्ठ पत्रकार एवं गीतकार प्रमोद नारायण मिश्र ने अपनी विरह रचना “आज कहने दो, वरना कह न पाएंगे” प्रस्तुत कर माहौल को भावुक बना दिया। अशोक भारती, रामवृक्ष राम चकपुरी, अरुण कुमार तुलसी, वरिष्ठ कवयित्री उषा किरण श्रीवास्तव तथा कबीर श्री ने भी अपनी-अपनी रचनाओं से श्रोताओं की खूब सराहना बटोरी।
कार्यक्रम के अंत में समाजसेवी मोहन प्रसाद सिन्हा ने धन्यवाद ज्ञापन किया। गोष्ठी में सोनू कुमार, विशेष पाण्डेय, खुशी राज, तन्वी कुमारी, सुनील कुमार एवं राजीव कुमार सहित कई साहित्यप्रेमी श्रोता के रूप में उपस्थित रहे। साहित्यिक और सांस्कृतिक माहौल के बीच संपन्न हुई इस गोष्ठी ने श्रोताओं को कविता की विभिन्न विधाओं से रूबरू कराया।