-दुग्ध उत्पादन से बदली ग्रामीण महिलाओं की तस्वीर, जीविका दीदियां बन रहीं आत्मनिर्भर
मुजफ्फरपुर।दीपक कुमार तिवारी। जिले में जीविका समूह, सरकारी योजनाओं और तिरहुत दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ लिमिटेड (तिमूल) के सहयोग से ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक स्थिति लगातार मजबूत हो रही है। दुग्ध उत्पादन के माध्यम से महिलाएं न केवल अपनी आय बढ़ा रही हैं, बल्कि कर्जमुक्त होकर आत्मनिर्भरता की दिशा में भी तेजी से आगे बढ़ रही हैं।
सकरा प्रखंड के रानी रामपुर गांव की संगीता देवी इसकी प्रेरणादायक मिसाल हैं। उन्होंने कठिन आर्थिक परिस्थितियों का सामना करते हुए दुग्ध उत्पादन के सहारे अपने परिवार की स्थिति पूरी तरह बदल दी। संगीता देवी ने बताया कि दो वर्ष पूर्व उनका परिवार भारी आर्थिक संकट से गुजर रहा था। हालात इतने खराब हो गए थे कि वर्ष 2024 में उन्हें अपनी दो भैंसें 80 हजार रुपये में बेचनी पड़ी थीं। इससे तत्काल जरूरतें तो पूरी हो गईं, लेकिन परिवार की नियमित आय का स्रोत खत्म हो गया।
हालांकि उन्होंने एक भैंस को बचाकर उसकी देखभाल जारी रखी और दुग्ध उत्पादन को फिर से शुरू करने का संकल्प लिया। इसी दौरान उन्हें जीविका समूह से 20 हजार रुपये का ऋण मिला। मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के तहत 10 हजार रुपये की सहायता राशि प्राप्त हुई, जबकि लेबर कार्ड के माध्यम से पति-पत्नी दोनों को पांच-पांच हजार रुपये मिले। कुल 40 हजार रुपये की राशि जुटाकर उन्होंने एक नई भैंस खरीदी और दूध उत्पादन का कार्य दोबारा शुरू किया।
दूध बिक्री से हुई नियमित आमदनी के बल पर उन्होंने सबसे पहले जीविका समूह का 20 हजार रुपये का ऋण चुकाया। इसके बाद 30 हजार रुपये की बचत कर एक और भैंस खरीदी। वर्तमान में उनके पास तीन भैंसें हैं और परिवार पूरी तरह कर्जमुक्त होकर आर्थिक रूप से सशक्त बन चुका है। उनके गांव की रेखा देवी, गुड्डी देवी और रीमा देवी भी दुग्ध उत्पादन के जरिए अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं।

जीविका की कार्यक्रम प्रबंधक अनीशा ने बताया कि जिले में लगभग 9 हजार जीविका दीदियां दुग्ध उत्पादन समितियों से जुड़ी हुई हैं। दूध की उचित बिक्री सुनिश्चित करने के लिए इन्हें तिमूल से जोड़ा गया है, जिससे महिलाओं को स्वरोजगार और स्थायी आय का अवसर मिल रहा है।
जानकारी के अनुसार मुजफ्फरपुर जिले में प्रतिदिन करीब 10 लाख लीटर दूध का उत्पादन होता है, जिसमें लगभग पांच लाख लीटर दूध की स्थानीय स्तर पर खपत हो जाती है। तिमूल के प्रबंध निदेशक फूल कुमार झा ने बताया कि जिले से प्रतिदिन करीब डेढ़ लाख लीटर दूध का संग्रह किया जा रहा है। दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सभी राजस्व गांवों में दूध संग्रह केंद्र और दुग्ध समितियों के गठन की पहल की जा रही है।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में जिले में लगभग 1300 दूध संग्रह केंद्र संचालित हैं। इसके अलावा अधिक दूध देने वाली नस्ल की गाय और भैंसों के लिए कृत्रिम गर्भाधान केंद्रों की संख्या बढ़ाई जा रही है। जिले में अभी 300 कृत्रिम गर्भाधान केंद्र कार्यरत हैं। सेक्स-सॉर्टेड सीमेन तकनीक को भी बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे 80 प्रतिशत तक बछिया जन्म लेने की संभावना रहती है और भविष्य में दुग्ध उत्पादन बढ़ने की उम्मीद है।
दुग्ध पशुओं के लिए हरे चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु किसानों को बीज उपलब्ध कराए जा रहे हैं। साथ ही जिले में स्थापित साइलेंज प्लांट के माध्यम से प्रतिवर्ष लगभग दो हजार टन हरा चारा तैयार किया जा रहा है, जिससे पशुपालकों को काफी लाभ मिल रहा है।
ग्रामीण क्षेत्रों में दुग्ध उत्पादन आधारित आजीविका मॉडल महिलाओं के लिए आर्थिक सशक्तिकरण का मजबूत माध्यम बनकर उभर रहा है और हजारों परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहा है।












