-चार महीने से लापता लैपटॉप कारोबारी दंपती की हत्या का खुलासा, छोटे भाई पर हत्या का आरोप
मुजफ्फरपुर। ब्रह्मपुरा थाना क्षेत्र के भगत मार्केट से करीब चार महीने पहले लापता हुए लैपटॉप कारोबारी मनोज भगत और उनकी पत्नी मीनू देवी की गुमशुदगी की गुत्थी पुलिस ने सुलझा ली है। पुलिस ने रविवार को बोचहां थाना क्षेत्र के मुरादपुर में दरभंगा फोरलेन किनारे जंगल से दोनों के शव बरामद किए। शव कंबल और बेडशीट में बंधे हुए मिले। पुलिस के अनुसार, संपत्ति विवाद में दंपती की हत्या उनके छोटे भाई अविनाश उर्फ अनुज ने की थी। आरोपी को बनारस से बरामद करने के बाद पूछताछ की गई, जिसमें उसने हत्या की बात स्वीकार की है।
एसडीपीओ टाउन-2 विनीता सिन्हा ने बताया कि 20 मई को दंपती के लापता होने के बाद उनकी पुत्री के आवेदन पर ब्रह्मपुरा थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। मामले की जांच के लिए विशेष जांच टीम गठित की गई थी। टीम बिहार के अलावा दूसरे राज्यों में भी छापेमारी कर रही थी। इसी दौरान मनोज भगत का छोटा भाई अविनाश उर्फ अनुज भी चार जून से लापता हो गया। उसकी बहन सारिका ने भी उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस टीम ने अनुज को बनारस से बरामद किया।
पुलिस के अनुसार, पूछताछ में अनुज ने बताया कि 19 मई की देर रात घर में संपत्ति को लेकर उसके भाई मनोज भगत और भाभी मीनू देवी से विवाद हुआ था। इसी दौरान दोनों की कथित रूप से हत्या कर दी गई। हत्या के बाद दोनों शवों को गाड़ी में रखकर बोचहां थाना क्षेत्र में सड़क किनारे जंगल में फेंक दिया गया और इसके बाद वह फरार हो गया।
जानकारी के अनुसार, मनोज भगत और उनकी पत्नी मीनू देवी 19-20 मई की दरमियानी रात अपने घर और मार्केट से अचानक लापता हो गए थे। दोनों के मोबाइल फोन भी लगातार बंद मिल रहे थे। काफी तलाश के बाद जब कोई सुराग नहीं मिला तो परिजनों ने पुलिस को सूचना दी। इसके बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की।
आरोपी की निशानदेही पर रविवार को मुरादपुर में दरभंगा फोरलेन किनारे जंगल से दोनों शव बरामद किए गए। शव कंबल और बेडशीट में बंधे हुए थे। शव बरामद होने के बाद एफएसएल टीम को मौके पर बुलाया गया, जिसने घटनास्थल से वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए। पुलिस ने दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए एसकेएमसीएच भेज दिया है।

जांच के शुरुआती दौर में पुलिस को दंपती के घर के कमरे और छत पर खून के संदिग्ध छींटे मिले थे। एफएसएल और डॉग स्क्वायड की टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की थी। फॉरेंसिक जांच में खून इंसानी होने की पुष्टि हुई थी। इसके बाद पुलिस ने तकनीकी सर्विलांस समेत अन्य माध्यमों से जांच को आगे बढ़ाया।
दंपती की इकलौती बेटी शेफाली ने शुरुआत से ही अपने चाचा अनुज पर संदेह जताया था। उसने संपत्ति और जमीन-जायदाद पर कब्जे की नीयत से माता-पिता के अपहरण की आशंका जाहिर की थी। पुलिस ने इस एंगल को भी जांच में शामिल किया और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई आगे बढ़ाई।
पुलिस अब बरामद साक्ष्यों और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई कर रही है। शवों की पहचान की पुष्टि के लिए डीएनए जांच समेत अन्य कानूनी प्रक्रियाएं भी कराई जा रही हैं। पुलिस आरोपी से पूछताछ कर हत्या के पूरे घटनाक्रम और शवों को ठिकाने लगाने से जुड़े अन्य पहलुओं की जानकारी जुटा रही है। घटना के खुलासे के बाद ब्रह्मपुरा और अहियापुर इलाके में सनसनी फैल गई है, जबकि मृतक दंपती के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।












