-सीयूएसबी में प्रसिद्ध उपन्यासकार डॉ. ताबिश खैर का “साहित्य क्यों मायने रखता है?” विषय पर व्याख्यान
गया।संवाददाता।
प्रसिद्ध उपन्यासकार एवं कवि डॉ. ताबिश खैर ने दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) में “साहित्य क्यों मायने रखता है?” विषय पर व्याख्यान दिया । जन सम्पर्क पदाधिकारी (पीआरओ) मो. मुदस्सीर आलम ने बताया कि सीयूएसबी के कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह के मार्गदर्शन में विवि के अंग्रेजी विभाग द्वारा पूर्वोक्त व्याख्यान को आयोजित किया गया था । उन्होंने बताया कि अंग्रेजी विभाग द्वारा इस व्याख्यान के आयोजन का उद्देश्य समकालीन समय में साहित्य की प्रासंगिकता को समझना था । व्याख्यान सत्र की शुरुआत डॉ. ताबिश खैर को अंगवस्त्र एवं स्मृति चिन्ह से सम्मानित करके किया गया है।

डॉ. अर्पणा झा, डॉ. विपिन कुमार सिंह और प्रो. प्रभात कुमार सिंह द्वारा आमंत्रित वक्ता का औपचारिक अभिनंदन किया गया है। इसके बाद विभाग अध्यक्ष डॉ. विपिन कुमार सिंह ने मुख्य वक्ता एवं अन्य गणमान्य अतिथियों का स्वागत किया और इसके पश्चात संयोजक डॉ. सुनील कुमार ने मुख्य वक्ता का परिचय कराया गया है।अपने संबोधन की शुरुआत डॉ. ताबिश खैर ने इस तथ्य पर बल देते हुए किया कि साहित्य अब केवल एक आख्यान बनकर नहीं रह गया बल्कि यह एक बौद्धिक चिंतन का माध्यम हो गया है, इसलिए साहित्य मायने रखता है। उन्होंने भाषा और साहित्य के बीच एक सुंदर सम्बन्ध अभिव्यक्त किया और कहा कि यद्यपि भाषा साहित्य की रचना का साधन है और साहित्य यथार्थ की भाषा है। डॉ. खैर ने अपने वक्तव्य में सन्दर्भ स्थापित करने के लिए 19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में रचित उपन्यास ‘ हार्ट ऑफ डार्कनेस ’ का सहारा लिया गया है। उन्होंने कम्प्यूटेशनल विधियों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के साहित्य अध्ययन में अत्यधिक उपयोग की भी आलोचना की। इसके बजाय उन्होंने साहित्य पढ़ने के चिंतनशील पहलू पर ध्यान केंद्रित किया गया है। व्याख्यान के पश्चात प्रश्न – उत्तर सत्र में शोधार्थी सरफराज नवाब और पीयूष कुमार ने पोस्टहुमनिस्म प्रभाव से संबंधित प्रश्न पूछें। डॉ. सुनील कुमार ने लोकप्रिय वेब श्रृंखला और मिम्स में प्रयुक्त भाषा के अवलोकन के संदर्भ में प्रश्न किया गया है। अभय एल. एक्का ने भी वक्ता से उनके नवीनतम पुस्तक ‘ द बॉडी बाय द शोर ’ (2022) के बारे में विचार साझा करने का अनुरोध किया गया है। व्याख्यान के बाद प्रो प्रभात कुमार सिंह ने साहित्य और चिंतनशील अध्ययन की समावेशिता पर अपनी अंतर्दृष्टि साझा की। इसके बाद भाषा एवं साहित्य पीठ के अधिष्ठाता प्रो सुरेश चंद्रा ने “साहित्य क्यों मायने रखता है?” विषय पर चर्चा करते हुए हिंदी साहित्य पर प्रकाश डाला है।
मंच का संचालन विभाग की दीक्षा ने कियागया है | डॉ. अर्चना कुमारी से धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए मुख्य वक्ता, डॉ. ताबिश खैर के साथ – साथ कुलपति प्रो. के.एन. सिंह, प्रो. सुरेश चंद्र, विभागाध्यक्ष डॉ. विपिन कुमार सिंह तथा संयोजक डॉ. सुनील कुमार को उनके सक्रिय प्रयासों के लिए धन्यवाद ज्ञापन किया है इसके साथ ही उन्होंने सभी प्रतिभागियों को उनकी सक्रिय भागीदारी और व्याख्यान सत्र को सफल बनाने के लिए धन्यवाद दिया है।












