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कार सेवक के रूप में 1990 व 1992 में पुलिस से छुप कर अयोध्या गए थे विनोद

चंपारण की खबर::

-सौगन्ध राम की खाते हैं मंदिर वहीं बनाएंगे हुआ पूरा: राय विनोद
– कार सेवक के रूप में 1990 व 1992 में पुलिस से छुप कर अयोध्या गए थे विनोद

मोतिहारी / राजन द्विवेदी ।

आगामी 22 जनवरी का दिन मेरे लिए वो दिन है जिसके लिए मैने और मेरे जैसे कार
सेवको ने अपनी जान की बाजी लगाने तक की तैयारी कर ली थी। 1990 का दौर था और उसी वक़्त राम जन्मभूमि का आंदोलन शुरू हुआ था। कैसे – कैसे अयोध्या पहुंच गया पर वहां की सरकार ने कार सेवको पर गोली चलवा दी। मेरे साथ चल रहे मुज़फ्फरपुर के कार सेवक भाई संजय सिंह की गोली लगने से मौत हो गयी और मैं बाल बाल बचा। कार सेवको की अगुआई कर रहे अशोक सिंघल के नेतृव में उनका दाह संस्कार करके यह तय हुआ कि चाहे जो हो मन्दिर के गर्भगृह में जाना तय हुआ। इन सभी बातों को याद करके संग्रामपुर के भवानीपुर गांव निवासी राय विनोद शर्मा भावुक हो गए। उन्होंने उस दिन को याद करते हुए कहां की मैं अशोक सिंघल के साथ अगली पंक्ति में खड़ा था आगे पुलिस लाठी चलाने के लिए मौजूद थी फिर भी हम लोग नारे लगाते हुए घुसे लाठियां चली अशोक सिंघल घायल हुए मुझे भी चोटे आयी। पुनः1992 के दौर में कार सेवको का जत्था ट्रेन अयोध्या के लिए रवाना हुआ पुलिस ट्रेन से चिन्हित कर उतराने लगी। लेकिन किसी तरह छुप कर अयोध्या पहुच गया। जबकि मोतिहारी के आगरवा से लगभग एक दर्जन लोग निकले लेकिन पुलिस की चौकसी के कारण सिर्फ मैं ही अयोध्या पहुंचा। बाकी लोगों को पुलिस ने कई स्टेशनों पर जोर जबरदस्ती उतार दिया। वहां जाने पर क्या होगा किसी को अंदाजा नही था। फिर भी बाबुजी ने मुझ जाने दिया। ट्रेन में जैसे ही कारसेवक राम सौगन्ध खाते हैं मन्दिर वहीं बनायेगे नारे गूँजती पुलिस सक्रिय जाती।

अयोध्या का माहौल बिल्कुल अलग था। सभी कार सेवक सिंघल जी के नेतृत्व में कारसेवको ने पूर्व से बने गुम्बद को समतल करने के लिए जुट गए। सिंघल जी पुलिस की लाठी से चोटिल हुए अब अयोध्या का माहौल बदल था फोर्स ने कारसेवको पर गोलियों की बौछार कर दी। उस दौरान उत्तर प्रदेश पुलिस के एक व्यक्ति ने मुझे उस वक़्त छुपने में मदद की। तब तक कार सेवको ने गुबन्ध को कौन कहे पूरी जगह को ही समतल कर दिया। अब जब 22 जनवरी को कारसेवकों के खाए सौगन्ध पूरे हो रहें हैं तो बड़ी ही खुशी मिल रही हैं।