Advertisement

एक ईमानदार अधिकारी के बहाने…

#एक ईमानदार अधिकारी के बहाने…

देश का हर नागरिक चाहता है कि एक ईमानदार अधिकारी हो तो पूरे करप्ट सिस्टम को बदल दे हर कोई चाहता है की भगत सिंह कैसे क्रांतिकारी पैदा हो पर कोई नहीं चाहता कि उसके घर में पैदा हो बिहार में एक आईएएस अधिकारी है के के पाठक थोड़े हठ धर्मी है कड़क मिजाज है बावजूद इसके ईमानदार है। बिहार की मृत प्राय हो चुकी सरकारी शिक्षा व्यवस्था को इस कड़क अधिकारी ने महज 6 महीने में पटरी पर ही नहीं लाया बल्कि दौड़ा दिया। मुख्यमंत्री ने इन्हें विभाग में खुली छूट दे रखी थी 27 लाख के करीब वैसे बच्चों का नाम सरकारी विद्यालयों से काट दिया गया जो नियमित रूप से विद्यालय नहीं आते थे या जिनका नाम सिर्फ सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए विद्यालयों में रखा गया था वैसे शिक्षकों पर भी कार्रवाई हो गई जो समय पर विद्यालय नहीं आते थे। बिहार लोक सेवा आयोग के माध्यम से लगभग ढाई लाख शिक्षकों की बहाली भी हो गई उन्हें विद्यालय भी आवंटित कर दिया गया पर पाठक का ही खौफ था कि पूरा सिस्टम खुद ब खुद पटरी पर आ गया था। अब खबर है कि पाठक लंबी छुट्टी पर चले गए है।

13 जनवरी को शिक्षक भर्ती अभियान द्वितीय चरण के शिक्षकों को नियुक्ति पत्र वितरित होना है इस कार्यक्रम में पाठक नहीं रहेंगे और शायद अब शिक्षा विभाग में भी पाठक नहीं रहेंगे। सुबह 9:00 बजे से शाम के 5:00 तक विद्यालयों में एक पैर पर खड़ा होकर पिछले दो-तीन महीने से पढ़ा रहे वैसे शिक्षक भी राहत की सांस ले रहे होंगे जो सिर्फ सरकारी नौकरी करते हैं।उन्हें ईमानदार अधिकारी मंजूर नहीं या वह लोग भी खुश होंगे जो पाठक के आने के बाद से आम जनता के सामने बेनकाब हो गए थे पूरे करप्ट सिस्टम को एक आदमी नहीं बदल सकता जैसे ही वह बदलने की कोशिश करता है वह तमाम लोग उसकी टांग खींचने लगते हैं जो बरसों से सिस्टम को अपनी जेब में रखकर चलते हैं। बिहार को के के पाठक विकास वैभव जैसे ईमानदार अधिकारी नहीं चाहिए। पर एक बात तो कान खोल कर सुन लीजिए कि के के पाठक के शिक्षा विभाग से विदाई के बाद बिहार के शिक्षा व्यवस्था में जो बड़ा परिवर्तन दिख रहा था वह फिर वापस लौट जाएगा। आश्चर्य होता है जब ईमानदार व्यक्ति पर पूरा करप्ट सिस्टम लग जाता है तब आप और हम खामोश क्यों होते हैं क्यों नहीं उसे ईमानदार अधिकारी के लिए आवाज उठाते हैं।

#अनूप