-उच्च उपज और बेहतर लाभ के लिए केले के बंच का उन्नत प्रबंधन आवश्यक : डॉ. एस. के. सिंह
समस्तीपुर। केला एक महत्वपूर्ण फल फसल है, जिसकी खेती पूरे साल होती है और यह उष्णकटिबंधीय एवं उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर उगाया जाता है। केले की अधिकतम उपज और उच्च गुणवत्ता प्राप्त करने के लिए बंच (घौंद) का सही प्रबंधन आवश्यक है। डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. एस. के. सिंह ने कहा कि “बंच प्रबंधन के सही तकनीकों को अपनाने से केले के फलों का आकार, गुणवत्ता और उत्पादन क्षमता में सुधार होगा, जिससे किसानों की आमदनी भी बढ़ेगी।”
बंच प्रबंधन के महत्वपूर्ण पहलू:
1️⃣ थिनिंग (फिंगर थिनिंग) – फलों का चयन
कमजोर, छोटे और असमान फलों को निकालने से पोषक तत्वों का सही वितरण होता है।
इससे बड़े, स्वस्थ और उच्च गुणवत्ता वाले केले का उत्पादन होता है।
यह प्रक्रिया बंच निकलने के 7-10 दिनों के भीतर पूरी करनी चाहिए।
2️⃣ बंच बैगिंग – फलों को कीट और जलवायु प्रभाव से बचाना
बैगिंग करने से केला स्कैरिंग बीटल, रोग और पर्यावरणीय तनाव से सुरक्षित रहता है।
इससे फलों की त्वचा चिकनी रहती है, चमक बढ़ती है और बाजार में ऊंचे दाम मिलते हैं।
बंच निकलने के 10-15 दिनों के भीतर नीले, सफेद या पीले पॉलीथीन बैग का उपयोग करना चाहिए।
3️⃣ उर्वरकों का छिड़काव और पोषण प्रबंधन
2% पोटेशियम नाइट्रेट (KNO₃) स्प्रे से फलों का आकार और गुणवत्ता बढ़ती है।
कैल्शियम और बोरॉन का छिड़काव फलों की मजबूती और भंडारण क्षमता में सुधार करता है।

100-150 PPM गिब्बेरेलिक एसिड (GA₃) स्प्रे से फलों की वृद्धि तेज होती है।
4️⃣ बंच सपोर्ट – भारी बंच के लिए सहारा आवश्यक
भारी बंच होने से पौधा गिर सकता है, जिससे नुकसान हो सकता है।
‘V’ या ‘Y’ आकार की लकड़ी की स्टिक या बांस का सहारा देना चाहिए।
5️⃣ जल प्रबंधन और सिंचाई
ड्रिप सिंचाई सबसे प्रभावी तरीका है, जिससे पानी और पोषक तत्वों की सही आपूर्ति होती है।
गर्मी के मौसम में 4-5 दिन के अंतराल पर सिंचाई करें, जबकि मानसून में जलभराव से बचें।
6️⃣ रोग और कीट नियंत्रण
सिगाटोका रोग हो तो प्रोपिकोनाजोल 0.1% या मैंकोजेब 0.2% का छिड़काव करें।
फलों के धब्बा रोग के लिए कार्बेन्डाजिम 0.1% का स्प्रे करें।
थ्रिप्स और स्केल कीट को नियंत्रित करने के लिए नीम तेल 5% या क्लोरपायरीफॉस 0.2% का छिड़काव करें।
7️⃣ समय पर कटाई और विपणन
जब फल कोनों से गोल हो जाएं और बंच निकलने के 90-120 दिन बाद, तब कटाई करें।
कटाई सुबह या शाम के समय करें और केले को साफ कपड़े से पोंछकर स्टोर करें।
डॉ. एस. के. सिंह ने कहा कि वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाकर किसान अपनी पैदावार और मुनाफा बढ़ा सकते हैं। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे आधुनिक बंच प्रबंधन अपनाकर अपनी फसल की गुणवत्ता सुधारें और बाजार में अच्छे दाम पाएं।
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