अब सांपों से नहीं डरेंगे लोग, बीआरएबीयू के वैज्ञानिकों ने विकसित किया ‘स्नेक डिटेक्टर बैरियर’
-अब सांपों से नहीं डरेंगे लोग, बीआरएबीयू के वैज्ञानिकों ने विकसित किया ‘स्नेक डिटेक्टर बैरियर’
मुजफ्फरपुर। अब घर, गोदाम, खेत, भंडारण स्थल और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में सांपों की घुसपैठ से डरने की जरूरत नहीं होगी। मुजफ्फरपुर स्थित बीआरए बिहार विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने एक अभिनव और अत्यंत उपयोगी उपकरण विकसित किया है, जिसे ‘स्नेक डिटेक्टर बैरियर’ (सर्प निवारक अवरोध) नाम दिया गया है। यह तकनीक न केवल लोगों को सर्पदंश से बचाने में सहायक होगी, बल्कि सांपों के संरक्षण में भी अहम भूमिका निभाएगी।
इस नवाचार को विश्वविद्यालय के विज्ञान संकाय के पूर्व डीन प्रो. मनेंद्र कुमार तथा पीजी जूलॉजी विभाग के डॉ. ब्रज किशोर प्रसाद सिंह ने विकसित किया है। खास बात यह है कि इस डिवाइस के डिजाइन को यूके इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टीज ऑफिस से पेटेंट मिल चुका है, जिससे इसे अंतरराष्ट्रीय मान्यता भी प्राप्त हो गई है। इसे बिहार के वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

‘स्नेक डिटेक्टर बैरियर’ जंग-रोधी माइल्ड स्टील से बने डुअल-लेयर रिपेलेंट स्टेशन पर आधारित है। हर स्टेशन एक स्व-नियंत्रित यूनिट के रूप में कार्य करता है। इसके ऊपरी चेंबर में लगभग 300 ग्राम कंकड़ या रेत तथा 20 एमएल कार्बोलिक एसिड या पर्यावरण-अनुकूल तेल जैसे लौंग और सिट्रोनेला का प्रयोग किया जाता है। इस रासायनिक मिश्रण से निकलने वाली तीखी गंध नियंत्रित छिद्रों के माध्यम से बाहर फैलती है, जिससे सांप एक निश्चित सीमा से आगे प्रवेश नहीं कर पाते।
डिवाइस में एलईडी और वायरलेस सिग्नल की व्यवस्था भी की गई है, जिससे गंध की तीव्रता कम होने पर अलर्ट मिल जाता है। ठंडे मौसम में गंध के बेहतर प्रसार के लिए इसमें सोलर हीट प्लेट की वैकल्पिक सुविधा दी गई है। इसे जमीन पर बोल्ट या स्टैंड-माउंटेड फ्रेम के माध्यम से मजबूती से स्थापित किया जा सकता है।
इस डिवाइस की अनुमानित लागत करीब 1500 रुपये है। एक बार मिश्रण भरने के बाद यह लगभग 15 दिनों तक प्रभावी रहती है और रिफिल पर मात्र 40 से 50 रुपये का खर्च आता है।
प्रो. मनेंद्र कुमार के अनुसार, भारत में हर साल सर्पदंश से लगभग 60 हजार लोगों की मौत होती है। ऐसे में यह उपकरण मानव सुरक्षा के साथ-साथ पर्यावरण संतुलन बनाए रखने की दिशा में एक क्रांतिकारी समाधान साबित हो सकता है।