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अखंड सौभाग्य की कामना के साथ श्रद्धापूर्वक मनाया गया वट सावित्री व्रत

-अखंड सौभाग्य की कामना के साथ श्रद्धापूर्वक मनाया गया वट सावित्री व्रत

राजापाकर-संजय श्रीवास्तव। राजापाकर प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न पंचायतों में शनिवार को सुहागन महिलाओं ने श्रद्धा, भक्ति और पूरे वैदिक विधि-विधान के साथ वट सावित्री व्रत का अनुष्ठान किया। महिलाओं ने पति के स्वस्थ, सुखमय एवं दीर्घायु जीवन की कामना को लेकर वट वृक्ष के नीचे पूजा-अर्चना की तथा परिवार में सुख-शांति, धन-धान्य और समृद्धि की मंगलकामना की।

इस अवसर पर महिलाओं ने पारंपरिक सोलह श्रृंगार कर निर्जला व्रत रखा। वट वृक्ष की जड़ में जल अर्पित करने के बाद रोली, अक्षत, फूल एवं प्रसाद चढ़ाया गया। महिलाओं ने कच्चे सूत (कलावा) को वट वृक्ष के तने पर लपेटते हुए सात एवं ग्यारह बार परिक्रमा की तथा वट सावित्री कथा का श्रवण एवं पाठ किया।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस व्रत का नाम माता सावित्री के नाम पर पड़ा, जिन्होंने अपनी निष्ठा, तप और बुद्धि के बल पर यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस प्राप्त किए थे। हिंदू धर्म में वट वृक्ष को अमरता का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि इसकी जड़ में ब्रह्मा, तने में भगवान विष्णु और शाखाओं में भगवान शिव का वास होता है। इसकी पूजा करने से वैवाहिक जीवन में सुख-शांति और अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

पूजा-अर्चना के बाद महिलाओं ने अपनी सास एवं योग्य ब्राह्मणों को साड़ी, सिंदूर, चूड़ी सहित सुहाग की सामग्री, फल एवं दक्षिणा दान कर आशीर्वाद प्राप्त किया। पूरे क्षेत्र में वट सावित्री व्रत को लेकर धार्मिक एवं भक्तिमय माहौल बना रहा।