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हर्ष फायरिंग केस में भाजपा विधायक राजू कुमार सिंह को 4 साल की सजा

-हर्ष फायरिंग केस में भाजपा विधायक राजू कुमार सिंह को 4 साल की सजा

-विधायकी जाएगी
-साहेबगंज सीट पर उपचुनाव तय

मुजफ्फरपुर/नई दिल्ली। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने वर्ष 2018 के चर्चित हर्ष फायरिंग मामले में बिहार के साहेबगंज से भाजपा विधायक और पूर्व मंत्री डॉ. राजू कुमार सिंह को चार वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने गैर-इरादतन हत्या (आईपीसी की धारा 304 भाग-2) और आर्म्स एक्ट के तहत दोषी ठहराते हुए यह फैसला सुनाया। साथ ही मृतका के पति को 25 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश भी दिया है। यदि निर्धारित मुआवजा नहीं दिया गया तो दोषी को तीन महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। आर्म्स एक्ट के मामले में भी उन्हें दो महीने की सजा सुनाई गई है।
इस फैसले के साथ ही जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 8(3) के तहत उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त होना तय माना जा रहा है। कानून के अनुसार किसी सांसद या विधायक को दो वर्ष या उससे अधिक की सजा मिलने पर वह तत्काल प्रभाव से सदन की सदस्यता के लिए अयोग्य हो जाता है। ऐसे में मुजफ्फरपुर जिले की साहेबगंज विधानसभा सीट रिक्त मानी जाएगी और वहां उपचुनाव की प्रक्रिया शुरू होगी।
यह मामला 31 दिसंबर 2018 की रात दिल्ली के वसंत कुंज स्थित एक फार्महाउस में आयोजित नववर्ष समारोह से जुड़ा है। आरोप था कि जश्न के दौरान राजू कुमार सिंह ने हर्ष फायरिंग की, जिसकी गोली वहां मौजूद महिला चिकित्सक डॉ. अर्चना गुप्ता को लग गई। गंभीर रूप से घायल डॉक्टर की तीन दिन बाद इलाज के दौरान मौत हो गई थी। इसी मामले में 6 जून 2026 को अदालत ने उन्हें दोषी करार दिया था और शनिवार को सजा का ऐलान किया।


अदालती फैसले के बाद बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। साहेबगंज विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव की संभावना के बीच भाजपा के सामने नई राजनीतिक चुनौती खड़ी हो गई है। निर्वाचन आयोग को विधानसभा सचिवालय से औपचारिक सूचना मिलने के बाद उपचुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। यदि विधानसभा का शेष कार्यकाल एक वर्ष से अधिक है तो कानून के अनुसार छह महीने के भीतर उपचुनाव कराया जाएगा।
डॉ. राजू कुमार सिंह उत्तर बिहार की राजनीति का चर्चित चेहरा रहे हैं। उनका जन्म 12 जनवरी 1970 को हुआ था। उन्होंने यूक्रेन की एल.वी.ओ.वी. पॉलिटेक यूनिवर्सिटी से बी.टेक और एम.टेक की पढ़ाई की तथा बाद में मानद पीएचडी की उपाधि भी प्राप्त की। राजनीति में आने से पहले वे फार्मास्युटिकल कारोबार से जुड़े रहे और उनका व्यवसाय भारत के अलावा रूस, अमेरिका सहित कई देशों तक फैला। वे बिहार सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं और प्रदेश के संपन्न नेताओं में उनकी गिनती होती रही है।
अब अदालत के फैसले के बाद न केवल उनकी विधायकी समाप्त होगी, बल्कि जनप्रतिनिधित्व कानून के प्रावधानों के अनुसार सजा पूरी होने के बाद भी अगले छह वर्षों तक वे कोई चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। इससे उनके राजनीतिक भविष्य पर बड़ा असर पड़ने की संभावना है।