-जदयू-राजद में चल रहे दो बड़े अदंरूनी घमासान, I.N.D.I.A. का कैसे होगा बेड़ा पार?
पटना।सम्वाददाता।
देश में लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Election 2024) का समय नजदीक आ रहा है। इस बीच बिहार (Bihar) के सत्ताधारी दलों में अब अंदरूनी कलह उभर कर सामने आ रही है।
दरअसल, जनता दल यूनााइटेड (JDU) और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के कई नेता व मंत्री अलग-अलग मामलों को लेकर आपस में उलझते दिखाई दे रहे हैं तो दूसरी ओर किसी ने पार्टी का साथ छोड़ दिया है।
ऐसे में केंद्र की सत्ता में बैठे नेशनल ड्रेमोक्रेटिक अलायंस (NDA) को चुनौती देने के लिए बने गठबंधन आईएनडीआईए (INDIA Alliance) का क्या होगा? यह विपक्षी दलों के आंतरिक समन्वय पर ही काफी हद तक निर्भर है।
पहले वह विवाद विस्तार से जान लीजिए, जिससे बिहार की सियासत इन दिनों गरमाई हुई है। राजनीति के विश्लेषकों की मानें तो यह विवाद प्रदेश की सियासत में बड़ा उलटफेर कर सकता है।
ठाकुर का कुआं’ कविता से उठी चिंगारी:
पिछले दिनों राजद के राज्यसभा सांसद मनोज झा ने महिला आरक्षण बिल पर चर्चा के दौरान सदन में ओमप्रकाश वाल्मीकि की ‘ठाकुर का कुआं’ कविता पढ़ी थी।
इस पर भाजपा (BJP) समेत कई दलों ने आपत्ति जताई थी। सभी ने इसे ठाकुर (राजपूत) समाज का अपमान बताकर राजद और बिहार की महागठबंधन की सरकार को घेरा।

यह विवाद तब और बढ़ गया जब सत्ताधारी दल जदयू (JDU) और राजद (RJD) के ही ठाकुर नेताओं ने मनोज झा (Manoj Jha) के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।
दरअसल, राजपूत समाज से आने वाले पूर्व सांसद आनंद मोहन (Anand Mohan) के बेटे चेतन आनंद (Chetan Anand) राजद से विधायक हैं, उन्होंने मनोज झा के कविता पाठ को लेकर अपने एक्स हैंडल पर प्रतिक्रिया दी।
वहीं, विधायक के पिता व पूर्व सांसद आनंद मोहन (Anand Mohan) ने भी झा के कविता पाठ पर आपत्ति जताई। इसके साथ ही झा की जीभ खींचकर फेंकने की बात तक कह दी।
आनंद मोहन (Anand Mohan) की यह बात राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) व बिहार के उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव को रास नहीं आई।
लालू ने नाम लिए बिना पहले दी हिदायत फिर चलाए तीखे ‘शब्दबाण’:
पहले तो लालू यादव (Lalu Yadav) ने बिना किसी का नाम लिए मनोज झा को कविता विवाद पर धमकी भरे शब्द कहने वालों को संयम रखने की हिदायत दी। हालांकि, इसका कुछ असर नहीं हुआ।
लालू ने तब अगले ही दिन आनंद मोहन को मीडिया के माध्यम से सीधे समझाया, उन्होंने कहा कि उन्हें अक्ल नहीं है।
लालू के इस तीखे अंदाज के बाद आनंद मोहन शांत हुए और मीडिया के सामने प्रतिक्रिया देने के बजाय ठाकुर कविता विवाद को लेकर हाथ जोड़ लिए और चलते बने।
विवाद यहीं नहीं थमा…
बिहार के उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने शनिवार को कहा कि यदि किसी मुद्दे (ठाकुर कविता विवाद) को लेकर किसी को आपत्ति है तो उसे पार्टी फोरम में बात रखनी चाहिए। हम इसका संज्ञान लेंगे। यह बात उन्होंने राजद विधायक चेतन आनंद के मामले में कही। संभव है कि अब पार्टी के अंदर चर्चा के बाद चेतन के खिलाफ एक्शन लिया जा सकता है।
इधर, जदयू नेता और मंत्री संजय झा (Sanjay Jha) ने भी राजद सांसद मनोज झा (Manoj Jha) का नाम लिए बिना नसीहत दी कि उन्हें सोच-समझकर बोलना चाहिए। वहीं, जदयू के एमएलसी संजय सिंह (JDU MLC Sanjay Singh) ने धमकी देते हुए कहा था कि ठाकुर आग हैं, उनसे पंगा मत लीजिए।
सतह पर आई जदयू की अंदरूनी कलह:
इधर, जदयू (JDU) की अंदरूनी कलह भी सतह पर है। ये विवाद बरबीघा विधानसभा क्षेत्र को लेकर है। ललन सिंह (Lalan Singh) की हिदायत के बाद भी भवन निर्माण मंत्री अशोक चौधरी (Ashok Choudhary) बरबीघा के दौरे पर गए।
सियासी गलियारों में इसे क्षेत्र में दखलंदाजी माना गया। स्थानीय विधायक सुदर्शन कुमार ने प्रेसवार्ता कर विरोध भी किया।
वहीं, अशोक चौधरी (Ashok Choudhary) ने इसे लेकर ललन सिंह (Lalan Singh) के साथ हुए विवाद पर और सुदर्शन कुमार के आरोप को लेकर सफाई भी दी।
आईएनडीआईए का कैसे होगा बेड़ा पार?
जदयू-राजद की इन अंदरूनी कलहों का आईएनडीआईए (INDIA Alliance) के भविष्य पर असर पड़ सकता है। जानकारों का मानना है कि यदि जदयू और राजद के बीच उनकी अंदरूनी कलह से दरार पड़ती है तो आईएनडीआईए की मुहिम खटाई में पड़ सकती है। बहरहाल, अभी सब भविष्य के गर्भ में छिपा हुआ है। देखना होगा कि ऊंट किस करवट बैठता है।












