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साहित्य भवन में मनायी गयी रामवृक्ष बेनीपुरी की पुण्यतिथि

-साहित्य भवन में मनायी गयी रामवृक्ष बेनीपुरी की पुण्यतिथि

मुजफ्फरपुर। नगर परिषद स्थित साहित्य भवन में सोमवार को नूतन साहित्यकार परिषद की ओर से प्रख्यात साहित्यकार, पत्रकार एवं स्वतंत्रता सेनानी रामवृक्ष बेनीपुरी की पुण्यतिथि मनायी गयी। कार्यक्रम में साहित्यकारों और परिषद के सदस्यों ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इस दौरान वक्ताओं ने रामवृक्ष बेनीपुरी के साहित्यिक योगदान के साथ स्वतंत्रता आंदोलन में उनकी भूमिका को याद किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता परिषद के अध्यक्ष चंद्रभूषण सिंह ‘चंद्र’ ने की। उन्होंने कहा कि रामवृक्ष बेनीपुरी का साहित्य राष्ट्रप्रेम, ग्रामीण जीवन, सामाजिक चेतना, स्वतंत्रता आंदोलन और मानवीय संवेदनाओं से गहराई से जुड़ा रहा। उन्होंने अपनी लेखनी के माध्यम से समाज में जागृति पैदा करने का काम किया। उनकी रचनाओं में राष्ट्रप्रेम, सामाजिक चेतना और मानवीय संवेदनाओं का प्रभावी समन्वय दिखाई देता है।

चंद्रभूषण सिंह ‘चंद्र’ ने कहा कि बेनीपुरी का साहित्य भारतीय समाज और जनजीवन का जीवंत दस्तावेज है। उनकी रचनाओं में गांव की मिट्टी, किसान-मजदूरों का संघर्ष, स्वतंत्रता आंदोलन की चेतना और आम लोगों की संवेदनाएं प्रमुखता से सामने आती हैं। ‘माटी की मूरतें’, ‘गेहूं और गुलाब’, ‘कैदी की पत्नी’ और ‘अंबपाली’ जैसी रचनाओं के माध्यम से उन्होंने हिंदी साहित्य को समृद्ध किया। उनकी भाषा सहज, ओजपूर्ण और प्रभावशाली थी, जिसके कारण उनका साहित्य आज भी सामाजिक बदलाव और मानवीय मूल्यों की प्रेरणा देता है।

परशुराम सिंह ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भागीदारी के साथ रामवृक्ष बेनीपुरी ने साहित्य और पत्रकारिता के क्षेत्र में भी अपनी अलग पहचान बनायी। उनकी रचनाओं में आम आदमी, गांव और समाज के संघर्षों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया है।

स्वराजलाल ठाकुर ने कहा कि बेनीपुरी ने अपनी लेखनी के माध्यम से समाज के कमजोर और वंचित वर्गों की आवाज को मजबूती दी। स्वतंत्रता आंदोलन में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।

वक्ताओं ने कहा कि रामवृक्ष बेनीपुरी की रचनाएं आज भी प्रासंगिक हैं। उनके साहित्य में मौजूद सामाजिक सरोकार और मानवीय मूल्य नई पीढ़ी को समाज और आम लोगों की समस्याओं से जुड़ने की प्रेरणा देते हैं।

कार्यक्रम में चंद्रकिशोर चौबे, सूबेदार नंदकिशोर सिंह, रामेश्वर महतो, महेश कुमार, रजनीश कुमार सहित अन्य साहित्यकार और परिषद के सदस्य मौजूद रहे।