-श्रद्धा-भक्ति के बीच महिलाओं ने मनाया रव-शन पर्व,पूछते हीं चढ़ा-6महीना का भाड़ा
मुुुजफ्फरपुर/बन्दरा। दीपक।
बन्दरा प्रखण्ड सहित जिला एवं आसपास के क्षेत्रों में शनिवार एवं रविवार को रव-शन पवनी(पर्व)मनाया गया। रविवार की सुबह इस दौरान भगवान भास्कर को पकवानों,मिष्ठानों एवं फल आदि का अर्घदान किया गया। कतरा(खेत के मेड़ पर उगने वाला एक प्रकार का घास) पूजन किया गया। बाद में कुल देवता(घर के देवता) के पूजन के साथ हीं व्रत पूर्ण हुआ। मिथलेश देवी, चंद्रा देवी,सन्दरा देवी एवं व्रतियों ने बताया कि यह व्रत साल में दो बार किया जाता है। साल के हिंदी मास अघन महीने में इसकी शुरुआत मानी जाती है, जबकि वैशाख महीने में इसका निस्तारण(पूर्ण या उतारा) माना जाता है।मिथिलांचल के गांवों में इस पर्व का सदियों से पुरानी प्रचलन है।इसे कुछ लोग मिनी छठ या छठ की बहन की उपासना भी कहते हैं।

कतरा पूजन के दौरान भाड़ा चढ़ने-उतरने का है प्रचलन:
बहिन जी हम्मर 6महीना के भाड़ा चढ़ल..! हां चढ़ल, आ हम्मर चढ़ल..! हां..अहूं के चढ़ल..और इस तरह से फास्टिंग का संकल्प वर्ती लेती रहीं।
प्रचलन है कि कतरा पूजन के दौरान अघन में 6 माह का भाड़ा चढ़ता है, जबकि वैशाख में 6 महीने का भाड़ा उतरता है। व्रतियों ने बताया कि 6 महीने के भाड़ा(भार) चढ़ने का अर्थ यह होता है कि अगले 6 महीने तक रविवार एवं मंगलवार को एक संझा(एक शाम)फास्टिंग (भूखे रहने) का विधान होता है। यदि किसी महीने में फास्टिंग में किसी कारण टूट होता है तो अगले महीने में अतिरिक्त (रविवार या मंगलवार को)फास्टिंग रहकर इस कमी को पूरा किया जा सकता है। ऐसी मान्यता है की कतरा पूजन के दौरान किसी अन्य व्रती या किसी भी व्यक्ति(उपलब्धता के आधार पर बच्चा/वयस्क/वृद्ध) से 6 महीने का भाड़ा चढ़ने या उतरने की बात पूछी जाती है।इस प्रति उत्तर में हां या ना का जवाब मिलने अनिवार्य होती है। यदि प्रति उत्तर हां हुआ तो भाड़ा चढ़ता या उतरता है।यदि ना हुआ तो यह व्रत अपूर्ण माना जाता है। फिर इसे(फास्टिंग) अगले 6 महीने लगातार करना पड़ता है।














