-श्रद्धा के साथ मनाया गया सोमवती अमावस्या पर्व
-सुहागिनों ने पति की दीर्घायु के लिए की पीपल पूजा
मुजफ्फरपुर। जिले के साहेबगंज प्रखंड एवं आसपास के क्षेत्रों में सोमवार को सोमवती अमावस्या का पावन पर्व श्रद्धा, आस्था और उल्लास के साथ मनाया गया। सुहागिन महिलाओं ने अपने परिवार की सुख-समृद्धि, खुशहाली और पति की दीर्घायु की कामना को लेकर पारंपरिक व्रत रखा तथा विधि-विधान से पूजा-अर्चना की।
इस वर्ष अमावस्या तिथि सुबह 8 बजे तक ही सीमित रहने के कारण तड़के सुबह से ही पूजा स्थलों और पीपल वृक्षों के आसपास महिलाओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। पारंपरिक वेशभूषा एवं सोलह शृंगार से सजी महिलाएं फल, फूल, धूप, दीप और रक्षा सूत्र से सुसज्जित टोकरियां लेकर पूजा स्थलों पर पहुंचीं।
श्रद्धालु महिलाओं ने पीपल वृक्ष की जड़ों में जल अर्पित कर भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी तथा भगवान शिव का स्मरण किया। इसके बाद वृक्ष पर कच्चा सूत लपेटते हुए परिक्रमा (भंवरी) दी और रक्षा सूत्र बांधकर दीप प्रज्ज्वलित किए। महिलाओं ने सुखद दांपत्य जीवन एवं परिवार की समृद्धि की कामना की।

स्थानीय व्रती महिलाओं ने बताया कि हिंदू धर्म में सोमवती अमावस्या का विशेष महत्व माना गया है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत और पूजन करने से अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है तथा घर-परिवार से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
हिंदू पंचांग के अनुसार जब अमावस्या तिथि सोमवार के दिन पड़ती है तो उसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है। सोमवार भगवान शिव और चंद्रदेव को समर्पित माना जाता है, जबकि अमावस्या तिथि पितृ देवों से जुड़ी होती है। इसी कारण इस दिन भगवान शिव, माता पार्वती और पितरों की पूजा का विशेष विधान है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन पवित्र नदियों में स्नान, दान-पुण्य तथा विशेष रूप से पीपल वृक्ष की 108 बार परिक्रमा करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि का आगमन होता है।
इस बार सोमवती अमावस्या पर सर्वार्थ सिद्धि एवं सुकर्मा योग जैसे शुभ संयोग भी बने, जिन्हें धार्मिक दृष्टि से अत्यंत फलदायी माना जा रहा है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि ऐसे दुर्लभ योगों में किया गया व्रत, दान और पूजन कई गुना पुण्यफल प्रदान करता है।












