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मुजफ्फरपुर: बन्दरा में छोटे बच्चों के लिए चारित्रिक संस्कारशाला का आयोजन

-छोटे बच्चों के लिए चारित्रिक संस्कारशाला का आयोजन

मुजफ्फरपुर/बन्दरा। दीपक।

बन्दरा ब्लॉक चौक पर छोटे बच्चों के लिए चारित्रिक संस्कारशाला का आयोजन किया गया। जिसमें सरकारी एवं प्राइवेट स्कूल के स्थानीय बच्चे शामिल थे। इस कार्यकर्म में बच्चों को नैतिक शिक्षा से संबंधित बातें बताई गई । स्वामी विरेन्द्रानन्द ने भगवान श्रीराम एवं रावण के चरित्रों को सप्रसंग बताया।उन्होंने कहा कि राम के चरित्र अगर चाहिए तो राम के कथनानुसार चलना होगा ।राम अपने माता पिता और गुरु का सम्मान करते है । माता पिता एक ऐसे व्यक्तित्व होते हैं जो अपने बच्चों को हमेशा खुद से आगे देखना चाहते हैं। वे एक सच्चे मित्र भी हैं जो सदा अपने बच्चों को उच्च संस्कार से पोषित करते रहते हैं।अतएव माता पिता की डांट फटकार बच्चों के उज्ज्वल भविष्य का निर्माण करते हैं। जो बच्चें माता पिता की आज्ञा नहीं मानते,उनके चरित्र का निर्माण नहीं हो सकता,चाहे कितना वे बड़ा विद्वान क्यू न हो जाए ।

रावण बहुत बड़ा विद्वान होते हुए भी मूर्ख कहलाया क्योंकि उसने कभी अपने माता पिता की बात नहीं मानी । रावण ने अपने पिता को भी घर से निकाल दिया था । आज अगर हम भी बहुत पढ़ लें, बहुत अच्छे पद पर पहुँच जाएं,पर अपने माता पिता का आदर सत्कार , सेवा, सम्मान नहीं की तो समझो हमारा आचरण भी रावण जैसा ही हैं। उन्होंने सीता और सुपर्णखा का उदाहरण देते हुए कहा सीता जब शिक्षा ग्रहण कर रही थी, तब वह घर का काम भी करती थी, झाड़ू पोंछा सब करती थी।झाड़ू लगाते समय ही उसने भगवान शिव के धनुष को बाएं हाथ से उठा लिया था । यानि सीता का संस्कार लाना है तो घर के कार्यों को भी करना चाहिए । हमारे यहाँ देवी की पूजा होती है ।शक्ति , धन , विद्या को पाने के लिए माँ की ही पूजा की जाती है । हमारा चरित्र ही हमारी पहचान है । चरित्र निर्माण में शिक्षा महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह ईमानदारी, सत्यनिष्ठा, सम्मान और जिम्मेदारी जैसे मूल्यों को विकसित करने के लिए एक आदर्श मंच प्रदान करता है। संस्कारशाला में बच्चों के उत्साह वर्धन के लिए क्विज़ का आयोजन किया गया। जिसमे हाई स्कूल के मुस्कान कुमारी को प्रथम पुरुस्कार एव आयुषी कुमारी को द्वितीय पुरुस्कार प्रदान किया गया।