-मनियारी मठ का होगा सौंदर्यीकरण, पर्यटन स्थल के रूप में मिलेगी नई पहचान
मुजफ्फरपुर। जिले के कुढ़नी प्रखंड स्थित सिखों के आस्था केंद्र मनियारी मठ का सौंदर्यीकरण किया जाएगा और इसे पर्यटन स्थल का दर्जा दिलाने की पहल तेज हो गई है। मठ में गुरु नानक देव की हस्तलिखित नौ दुर्लभ पांडुलिपियां सुरक्षित होने के कारण इसका धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व काफी बढ़ जाता है।
कुढ़नी विधायक सह बिहार सरकार के पर्यटन मंत्री केदार प्रसाद गुप्ता ने बताया कि मनियारी मठ को पर्यटन स्थल का दर्जा दिलाने की मांग उनकी पुरानी प्राथमिकताओं में शामिल रही है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2015 में पहली बार विधायक बनने के बाद से ही वे समय-समय पर विधानसभा में इस मुद्दे को उठाते रहे हैं। पर्यटन मंत्री बनने के बाद मठ का सौंदर्यीकरण उनकी प्राथमिकता में शामिल हो गया है।
मंत्री ने बताया कि मनियारी मठ में राधे-कृष्ण मंदिर के साथ सिखों का धर्मस्थल भी स्थित है। इसे देखते हुए निकटवर्ती सिलौत रेलवे स्टेशन पर ‘मनियारी मठ सिखों का धर्मस्थल’ का बोर्ड लगाया जाएगा। साथ ही रेल मंत्री को पत्र लिखकर पंजाब से आने-जाने वाली ट्रेनों के दो मिनट के ठहराव की मांग की जाएगी, ताकि सिख श्रद्धालु यहां पहुंचकर पांडुलिपियों के दर्शन कर सकें।

बिहार गुरुद्वारा समन्वय समिति के अध्यक्ष योगेन्द्र सिंह गंभीर ने बताया कि मनियारी मठ का इतिहास सिख धर्म से गहराई से जुड़ा हुआ है। यहां गुरु नानक देव जी की नौ दुर्लभ हस्तलिखित ग्रंथ पांडुलिपियां सुरक्षित हैं, जिन्हें देखने और पढ़ने के लिए समय-समय पर सिख अनुयायी पहुंचते हैं।
उन्होंने बताया कि गुरु नानक देव जी वर्ष 1516-17 में मनियारी आए थे और उन्होंने ही यहां मठ की स्थापना की थी। उनके बाद उनके पुत्र शिरचंद जी और लक्ष्मीचंद जी भी लंबे समय तक यहां रहे। मठ के तीसरे महंत भगत भगवान हुए, जो गया के ब्राह्मण थे और बाद में सिख धर्म अपनाकर यहां आए थे।
मनियारी मठ के सबसे प्रसिद्ध महंत मणिराम जी हुए, जिन्हें लोग मनु महाराज के नाम से भी जानते हैं। वे शिरचंद जी के अनुयायी थे। मठ परिसर में उनका समाधि स्थल भी स्थित है, जहां सिख समाज के साथ अन्य धर्मों के लोग भी श्रद्धा के साथ नमन करने पहुंचते हैं।











